अधिकारी और नेताओं के द्वंद में जनमुद्दे गुम

-सुभाष मिश्रलोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारू और सुगम तरीके से चलाने के लिए विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि एक सेतु...

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बदलता बस्तर : भय से विश्वास और विकास तक

बदलता बस्तर : भय से विश्वास और विकास तक

सुभाष मिश्रकभी गोलियों की आवाज़, बारूदी सुरंगों और लाल आतंक से कांपने वाला बस्तर आज एक नए मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है। जंगलों की खामोशी में अब विकास की हलचल सु...

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बस्तर का विकास मॉडल : गाय-भैंस से आगे, क्या बनेगा भारत का नया संसाधन क्षेत्र?

-सुभाष मिश्रबस्तर आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। दशकों तक देश के सुरक्षा मानचित्र में 'नक्सल प्रभावित क्षेत्र ...

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22 साल से अधूरी सीजीपीएससी की लड़ाई- ‘मेहनत हारी, पहुंच जीती’

सपनों की परीक्षा या सिस्टम का सबसे बड़ा दाग?अफसर बन गए कई चेहरे, खत्म नहीं हुआ विवादखेत बिके, गहने गिरवी रखे, हार गए मेहनती छात्रइंटरव्य...

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लीक होते पेपर और खामियां भुगतते छात्र

-सुभाष मिश्रदेश में हर साल लाखों युवा अपने सपनों को सच करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। कोई गांव छोड़कर शहर ...

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ईरान-अमेरिका तनाव के बीच मोदी की ‘समझाइश’ :क्या यह चेतावनी है या राजनीतिक अवसर?

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच मोदी की ‘समझाइश’ :क्या यह चेतावनी है या राजनीतिक अवसर?

-सुभाष मिश्रदुनिया के किसी भी हिस्से में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। उसका असर बाजार, तेल, मुद्रा, रोजगार और आम आदमी की रसोई तक पहुंचता है। आज पश्चिम...

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शहरीकरण और बुनियादी ढांचे का संकट

विकास की दौड़ में दम तोड़ते शहर और कराहते पहाड़-सुभाष मिश्र

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‘किताबों का खेल और खामोश व्यवस्था: छत्तीसगढ़ की शिक्षा में छिपा सच’

‘किताबों का खेल और खामोश व्यवस्था: छत्तीसगढ़ की शिक्षा में छिपा सच’

सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत में आज एक गंभीर और चिंताजनक प्रवृत्ति तेजी से उभर रही है शब्दों और ज्ञान से ज्यादा अब ‘कोर्स से बाहर की किताबों’ का खेल हाव...

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मई दिवस: संघर्ष की विरासत और बिखरता वर्तमान

-सुभाष मिश्रमैं आज मई दिवस पर यह कहने की हिम्मत नहीं कर पा रहा हूं कि 'दुनिया के मजदूर एक हो। न ही यह कह सकता ह...

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