मीडिया का वर्तमान परिदृश्य और चुनौतियां

-सुभाष मिश्रलोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता को समाज की आँख, कान और चेतना मानता है। मीडिया की दुनिया में बीते क...

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बढ़ती कंफर्ट इकॉनामी और उसके साइड इफेक्ट

-सुभाष मिश्रकभी एक दौर था जब बाजार तक पहुंचने के लिए इंसान को घर से निकलना पड़ता था। लोग सूची बनाकर किराना खरीद...

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देश और राज्यों पर बढ़ता कर्ज, बंटती रेवडिय़ां

-सुभाष मिश्रभारत इस समय एक ऐसे आर्थिक मोड़ पर खड़ा है, जहां विकास, कल्याण और चुनावी राजनीति के बीच संतुलन कठिन ...

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एक हंसी जो राष्ट्रीय शर्म का कारण बन गई !

-सुभाष मिश्रहंसी को लेकर हमारे पुराणों में कहा गया है। इससे बड़ा विभाजन का कोई हथियार नहीं। महाभारत में द्रोपदी...

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बदलता बस्तर : भय से विश्वास और विकास तक

बदलता बस्तर : भय से विश्वास और विकास तक

सुभाष मिश्रकभी गोलियों की आवाज़, बारूदी सुरंगों और लाल आतंक से कांपने वाला बस्तर आज एक नए मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है। जंगलों की खामोशी में अब विकास की हलचल सु...

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गर्मी का प्रकोप और पेयजल का संकट

-सुभाष मिश्रदेश इस समय दोहरी मार झेल रहा है-एक तरफ आसमान से बरसती आग और दूसरी तरफ धरती के भीतर सूखता पानी। उत्त...

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स्क्रीन का गुस्सा जमीन पर कैसे उतरेगा ?

-सुभाष मिश्रदेश के प्रधान न्यायाधीश के एक असावधान या राजनीतिज्ञों की भाषा में कहें तो राजनीति से प्रेरित अतिरेक...

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धंधे में धुत्त सुंदरता का बाजार

-सुभाष मिश्रसुंदर दिखने की चाह मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। हर व्यक्ति चाहता है कि वह आकर्षक दिखे, उसका व्...

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राजपाट — प्रफुल्ल पारे

मलाई की जगह मेहनत

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सत्ता का प्रतीक बुलडोजर

-सुभाष मिश्रभारत में बुलडोजर केवल अवैध निर्माण तोडऩे वाली मशीन नहीं रह गया है, बल्कि आज यह राजनीति, प्रशासनिक श...

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