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आखिर नागरिक कौन?

(नागरिकता का सवाल और भारत में सामाजिक संशय और राजीनिक द्वंद्व)-सुभाष मिश्र

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क्या अब शिक्षा भी सिर्फ विजेताओं के लिए रह गई है?

सुभाष मिश्रशिक्षा का उद्देश्य केवल मेधावी विद्यार्थियों को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि हर बच्चे के भीतर छिपी संभावना...

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गुंडागर्दी में लड़कियों की एंट्री

(नया स्टेटस सिम्बल)-सुभाष मिश्रपहली बार में यह शीर्षक आपको चौंका...

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जीवन का सफर और अंतिम पड़ाव का अकेलापन

-सुभाष मिश्रकभी भारतीय समाज में विवाह को केवल सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि जीवन भर का साथ माना जाता था। पति या पत्नी के चले जाने के बाद शेष जीवन यादों के सहारे ...

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शादी से मना करने की अपेक्षा हत्या आसान निर्णय

(प्रेम, विवाह और हत्या : बदलते समाज की भयावह कहानी)-सुभाष मिश्रह...

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हार की समीक्षा में अटका विपक्ष, अगले चुनाव की तैयारी में भाजपा

सुभाष मिश्रभारतीय राजनीति का स्वभाव तेजी से बदल रहा है। कभी देश की राजनीति पर लगभग एकछत्र प्रभाव रखने वाली कांग्रेस आज अपने अस्तित्व और पुनरुत्थान की चुनौती स...

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क्या अभनपुर से कांग्रेस को मिलेगा नया जीवन?

-सुभाष मिश्रभारतीय राजनीति में संगठन ही किसी दल की सबसे बड़ी ताकत होता है। विचारधारा, नेतृत्व और जनसमर्थन तभी स...

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राजपाट: प्रफुल्ल पारे

चोर का माल चांडाल खाएछत्तीसगढ़ में शराब का कारोबार खूब फलता-फूलता है। चाहे आबकारी विभाग की निगरानी में चलने वाला शराब का व्यापार, ठेकेदार करें या सरकार, कोई फ...

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परिसीमन का नया फार्मूला: प्रतिनिधित्व बढ़ेगा या राजनीति बदलेगी?

-सुभाष मिश्रलोकसभा चुनाव 2029 अभी दूर है, लेकिन उसकी राजनीतिक बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष और व...

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जमीन खरीदी का खेल: विकास किसका, फायदा किसका?

-सुभाष मिश्र'सभी भूमि गोपाल की - भारतीय संस्कृति में यह वाक्य इस भावना को दर्शाता है कि धरती किसी एक व्यक्ति की...

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