पाठ्यक्रम का रंग नहीं, ज्ञान का स्तर बदलना चाहिए

-सुभाष मिश्रभारत की शिक्षा व्यवस्था का इतिहास केवल स्कूलों और किताबों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह देश की वैचारि...

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सिनेमा, सत्य और सेंसरशिप के बीच ‘सतलुज’ का सवाल

-सुभाष मिश्रकहा जाता है कि सिनेमा समाज का आईना होता है, लेकिन आईना कभी पूरा समाज नहीं दिखाता। वह केवल वही दिखात...

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जीवन का सफर और अंतिम पड़ाव का अकेलापन

-सुभाष मिश्रकभी भारतीय समाज में विवाह को केवल सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि जीवन भर का साथ माना जाता था। पति या पत्नी के चले जाने के बाद शेष जीवन यादों के सहारे ...

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हार की समीक्षा में अटका विपक्ष, अगले चुनाव की तैयारी में भाजपा

सुभाष मिश्रभारतीय राजनीति का स्वभाव तेजी से बदल रहा है। कभी देश की राजनीति पर लगभग एकछत्र प्रभाव रखने वाली कांग्रेस आज अपने अस्तित्व और पुनरुत्थान की चुनौती स...

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राम नाम की लूट है… अयोध्या मंदिर में चढावे के चोरी का विवाद

राम नाम की लूट है… अयोध्या मंदिर में चढावे के चोरी का विवाद

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विपक्षी एकता : साथ भी और साथ के बाद भी संकट

-सुभाष मिश्र2014 के बाद भारतीय राजनीति में सबसे बड़ा परिवर्तन यह रहा कि भाजपा केवल एक पार्टी नहीं रही, बल्कि रा...

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बदलता बस्तर : भय से विश्वास और विकास तक

बदलता बस्तर : भय से विश्वास और विकास तक

सुभाष मिश्रकभी गोलियों की आवाज़, बारूदी सुरंगों और लाल आतंक से कांपने वाला बस्तर आज एक नए मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है। जंगलों की खामोशी में अब विकास की हलचल सु...

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बस्तर की मिठास : क्या इस बार वनवासियों तक पहुंचेगा लाभ?

बस्तर की मिठास : क्या इस बार वनवासियों तक पहुंचेगा लाभ?

-सुभाष मिश्रबस्तर की पहचान लंबे समय तक नक्सल हिंसा, भय और उपेक्षा से जुड़ी रही, लेकिन अब वही बस्तर विकास, आत्मनिर्भरता और उम्मीद की नई कहानी लिखने की कोशिश कर...

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लीक होते पेपर और खामियां भुगतते छात्र

-सुभाष मिश्रदेश में हर साल लाखों युवा अपने सपनों को सच करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। कोई गांव छोड़कर शहर ...

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ईरान-अमेरिका तनाव के बीच मोदी की ‘समझाइश’ :क्या यह चेतावनी है या राजनीतिक अवसर?

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच मोदी की ‘समझाइश’ :क्या यह चेतावनी है या राजनीतिक अवसर?

-सुभाष मिश्रदुनिया के किसी भी हिस्से में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। उसका असर बाजार, तेल, मुद्रा, रोजगार और आम आदमी की रसोई तक पहुंचता है। आज पश्चिम...

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