बस्तर की मिठास : क्या इस बार वनवासियों तक पहुंचेगा लाभ?

बस्तर की मिठास : क्या इस बार वनवासियों तक पहुंचेगा लाभ?

-सुभाष मिश्रबस्तर की पहचान लंबे समय तक नक्सल हिंसा, भय और उपेक्षा से जुड़ी रही, लेकिन अब वही बस्तर विकास, आत्मनिर्भरता और उम्मीद की नई कहानी लिखने की कोशिश कर...

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ईरान-अमेरिका तनाव के बीच मोदी की ‘समझाइश’ :क्या यह चेतावनी है या राजनीतिक अवसर?

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच मोदी की ‘समझाइश’ :क्या यह चेतावनी है या राजनीतिक अवसर?

-सुभाष मिश्रदुनिया के किसी भी हिस्से में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। उसका असर बाजार, तेल, मुद्रा, रोजगार और आम आदमी की रसोई तक पहुंचता है। आज पश्चिम...

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वाणी का संयम खोने का बढ़ता रिवाज

वाणी का संयम खोने का बढ़ता रिवाज

-सुभाष मिश्रभारतीय परंपरा में वाणी को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र का दर्पण माना गया है। कबीर, रहीम, तुलसीदास और गुरु नानक जैसे संतों ने बार-ब...

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ना तुम जीते, ना हम हारे

ना तुम जीते, ना हम हारे

-सुभाष मिश्रलोकसभा में महिला आरक्षण को लागू करने की ताज़ा कोशिश जिस तरह अंतत: विफल हुई, उसने भारतीय राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है जहाँ जीत और हार ...

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शक्ति और शोषण: कॉर्पोरेट गलियारों से उठता धुआँ

-सुभाष मिश्रमहाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की बीपीओ यूनिट से सामने आए कथित यौन उत्पीड़न, शोषण...

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परिसीमन: बढ़ती सीटें, सिकुड़ता संतुलन और सवालों के घेरे में नीयत

-सुभाष मिश्रभारत आज दुनिया की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है यह उपलब्धि कम, चुनौती अधिक है। सीमित भूगोल, सीमित ...

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भारतीय संविधान और बाबासाहेब अंबेडकर

-सुभाष मिश्रभारत के लोकतांत्रिक इतिहास में यदि किसी एक व्यक्ति ने विचार, संघर्ष और व्यवस्था तीनों स्तरों पर स्थायी छाप छोड़ी है, तो वह नाम है। दुर्भाग्य यह है...

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सुरों की वह लौ जो कभी नहीं बुझेगी

सुरों की वह लौ जो कभी नहीं बुझेगी

-सुभाष मिश्रआशा भोसले के निधन के साथ भारतीय संगीत जगत ने केवल एक महान गायिका को नहीं खोया, बल्कि एक पूरे युग को विदा होते देखा है। कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं जो...

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महिला आरक्षण: नीति, राजनीति और नीयत के बीच

-सुभाष मिश्रभारत की लोकतांत्रिक यात्रा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रश्न नया नहीं है, लेकिन हर बार यह प्...

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आस्था, परंपरा और अधिकार : क्या बहस भटक रही है?

-सुभाष मिश्रभारत सचमुच विविधताओं का देश है। यहाँ धर्म केवल पूजा की विधि नहीं, बल्कि जीवन का विस्तृत सांस्कृतिक ...

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