मानसून सत्र : टकराव की राजनीति या लोकतंत्र का अवसर?

-सुभाष मिश्रकभी भारतीय जनता पार्टी ने 'कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था, लेकिन भारतीय राजनीति का वर्तमान परि...

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पाठ्यक्रम का रंग नहीं, ज्ञान का स्तर बदलना चाहिए

-सुभाष मिश्रभारत की शिक्षा व्यवस्था का इतिहास केवल स्कूलों और किताबों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह देश की वैचारि...

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सिनेमा, सत्य और सेंसरशिप के बीच ‘सतलुज’ का सवाल

-सुभाष मिश्रकहा जाता है कि सिनेमा समाज का आईना होता है, लेकिन आईना कभी पूरा समाज नहीं दिखाता। वह केवल वही दिखात...

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चोरी : क्या यह हमारे सिस्टम का चरित्र बनती जा रही है?

चोरी : क्या यह हमारे सिस्टम का चरित्र बनती जा रही है?

-सुभाष मिश्र‘चोरी’ कभी अपराध मानी जाती थी, फिर वह आदत बनी, और अब ऐसा लगता है कि वह व्यवस्था का एक स्वीकृत व्यवहार बनती जा रही है। विडंबना यह है कि जिस दौर में...

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जीवन का सफर और अंतिम पड़ाव का अकेलापन

-सुभाष मिश्रकभी भारतीय समाज में विवाह को केवल सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि जीवन भर का साथ माना जाता था। पति या पत्नी के चले जाने के बाद शेष जीवन यादों के सहारे ...

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हार की समीक्षा में अटका विपक्ष, अगले चुनाव की तैयारी में भाजपा

सुभाष मिश्रभारतीय राजनीति का स्वभाव तेजी से बदल रहा है। कभी देश की राजनीति पर लगभग एकछत्र प्रभाव रखने वाली कांग्रेस आज अपने अस्तित्व और पुनरुत्थान की चुनौती स...

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राम नाम की लूट है… अयोध्या मंदिर में चढावे के चोरी का विवाद

राम नाम की लूट है… अयोध्या मंदिर में चढावे के चोरी का विवाद

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11 घंटे में खत्म हुआ किडनैपिंग का खेल, डेढ़ करोड़ की फिरौती की साजिश फेल

पानीपत। हरियाणा के पानीपत में एक सनसनीखेज अपहरण कांड का खुलासा हुआ है, जहां एक अधिशासी अभियंता (XEN) के 12 वर्ष...

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विपक्षी एकता : साथ भी और साथ के बाद भी संकट

-सुभाष मिश्र2014 के बाद भारतीय राजनीति में सबसे बड़ा परिवर्तन यह रहा कि भाजपा केवल एक पार्टी नहीं रही, बल्कि रा...

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