ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने रविवार को ईरान के ठिकानों पर जोरदार हमला किया है। यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा एक कंटेनर जहाज पर किए गए हमले के जवाब में की गई है। इस हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी और चालक दल को उसे बीच समुद्र में छोड़ना पड़ा था।
अमेरिकी सेना का बड़ा प्रहार
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि रविवार को किए गए हमलों में उन्होंने 140 ठिकानों को निशाना बनाया है। यह कार्रवाई पिछले दो हमलों की तुलना में बहुत बड़ी है। अमेरिका ने ईरान के मिसाइल साइट, ड्रोन लॉन्च केंद्र, गोला-बारूद के गोदाम और संचार उपकरणों को तबाह कर दिया है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान ने गलत फैसला लिया है और अब उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
ईरान का पलटवार और युद्ध का खतरा
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान भी चुप नहीं बैठा। ईरानी सेना ने खाड़ी के देशों जैसे बहरीन, कुवैत, कतर और ओमान पर भी हमले किए हैं। इस बीच यह खबर भी है कि अमेरिकी हवाई हमले में ईरानी नौसेना के लेफ्टिनेंट हामिदरेजा देहघानी की मौत हो गई है। लड़ाई के इस नए दौर ने 28 फरवरी से चल रहे युद्ध को खत्म करने की सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
होर्मुज बना विवाद की मुख्य वजह
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तेल और प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिए दुनिया का सबसे अहम रास्ता है। यही वजह है कि यह इलाका बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। कुछ समय पहले शांति की उम्मीद जगी थी, जब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने का ऐलान किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे पूरी दुनिया के लिए बड़ी कामयाबी बताया था। हालांकि, मौजूदा हालात ने फिर से पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है।
