गिरता रुपया, बढ़ता दबाव: सबसे बड़ा बोझ आखिर किस पर?

-सुभाष मिश्रभारतीय अर्थव्यवस्था के मौजूदा परिदृश्य में रुपये की गिरती कीमत अब महज एक वित्तीय आंकड़ा नहीं रह गई ...

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नक्सलवाद की समाप्ति का दावा और सियासत की धार

नक्सलवाद की समाप्ति का दावा और सियासत की धार

-सुभाष मिश्रसंसद में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का हालिया बयान केवल एक सुरक्षा उपलब्धि का ब्योरा नहीं था, बल्कि उसमें सियासत की तीखी धार भी साफ दिखाई दी। उन्...

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बदलते बस्तर में उमड़ता जनसैलाब : शांति, विकास और चुनौती का संगम

-सुभाष मिश्रबस्तर आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां अतीत की छाया और भविष्य की संभावनाएँ आमने-सामने दिखाई देती हैं। दशकों तक नक्सल हिंसा और भय के पर्याय रहे इस क...

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धुरंधर 2: सिनेमा, सियासत और सनसनी के बीच फंसी एक ‘नैरेटिव फिल्म’

-सुभाष मिश्रनिर्देशक आदित्य धर की फिल्म धुरंधर: द रिवेंज आज सिर्फ एक फिल्म नहीं रह गई है, यह एक ऐसा आईना बन गई ...

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धर्म, डर और विधेयक: छत्तीसगढ़ में कानून से ज्यादा संदेश क्यों हो गया है जरूरी

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक एक बार फिर पेश होने जा रहा है। पहली नजर में यह एक...

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पांच राज्यों के चुनाव: किसकी शह, किसकी मात?

-सुभाष मिश्रदेश में एक बार फिर लोकतांत्रिक उत्सव की शुरुआत हो गई है। इलेक्शन कमीशन आफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल, अ...

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सडक़ें चौड़ी, सोच संकरी

सडक़ें चौड़ी, सोच संकरी

-सुभाष मिश्रशहरों में बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने के लिए सरकारें लगातार नई सडक़ें बना रही हैं, पुराने मार्गों का चौड़ीकरण कर रही हैं और फ्लाईओवर तथा ओवरब्...

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त्योहारों के बदलते स्वरूप

-सुभाष मिश्रअभी होली का त्योहार बीता है और कई जगहों पर रंग पंचमी भी मनाई जा रही है, लेकिन जो लोग लंबे समय से इस...

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ईरान-इजरायल युद्ध और विश्व व्यवस्था की परीक्षा

-सुभाष मिश्रमिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा है और इस बार स्थिति सामान्य सीमा से कहीं आगे निकलती दिखा...

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यह जो पब्लिक है सब जानती है

-सुभाष मिश्रकक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े अध्याय को हटाने का निर...

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