ऑस्ट्रेलिया में दान और मदद संस्कृति

ऑस्ट्रेलिया से सुभाष मिश्रभारत जैसे समाज में दान केवल सामाजिक व्यवहार नहीं, बल्कि सांस्कृ...

Continue reading

धान का कटोरा और खनिज की धरती, संतुलन ही सुशासन की असली कसौटी

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की राजनीति में धान केवल एक फसल नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, समाज और सत्ता तीनों का केंद्र है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ...

Continue reading

सत्ता के साये में अपमान की संस्कृति

-सुभाष मिश्रकिसी एक अधिकारी के निलंबन या किसी एक घटना को लेकर उठी हलचल अक्सर कुछ दिनों में थम जाती है, लेकिन उस...

Continue reading

नक्सलवाद के समाप्ति के बाद बस्तर में किस तरह का विकास होगा?

नक्सलवाद के समाप्ति के बाद बस्तर में किस तरह का विकास होगा?

-सुभाष मिश्रकेंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा एक सामान्य प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं है। रायपुर के मेफेयर होटल में नक्सलवाद को लेकर हुई हा...

Continue reading

सरकार की प्राथमिकता में बस्तर

सरकार की प्राथमिकता में बस्तर

-सुभाष मिश्रकेंद्र में भाजपा सरकार हो या छत्तीसगढ़ में, इन दिनों यदि किसी एक भू-भाग पर सबसे अधिक राजनीतिक, प्रशासनिक और सुरक्षा स्तर की गतिविधियाँ केंद्रित दि...

Continue reading

खेल के मैदान में सत्ता की सियासत

खेल के मैदान में सत्ता की सियासत

-सुभाष मिश्रदरअसल, खेल को राजनीति से अलग रखने की बात जितनी बार दोहराई जाती है, उतनी ही बार वह झूठ साबित होती है। ओलंपिक से लेकर विश्व कप तक, हर बड़ा खेल आयोजन...

Continue reading

विमान हादसा, सत्ता का शून्य और महाराष्ट्र की राजनीति

-सुभाष मिश्रभारतीय राजनीति में कभी–कभी कोई एक घटना पूरे सत्ता-संतुलन को झकझोर देती है। यदि यह कल्पना भी की जाए ...

Continue reading

खान-पान, आस्था और क़ानून के बीच संतुलन की ज़रूरत

खान-पान, आस्था और क़ानून के बीच संतुलन की ज़रूरत

हिंदुस्तानी समाज की सबसे बड़ी पहचान उसकी बहुलता रही है—भाषा, पहनावा, आस्था और खान-पान, सबमें विविधता। समुद्र किनारे बसे समाजों के लिए मछली जीवन का स्वाभाविक ह...

Continue reading

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से: अश्लीलता का कारोबार- किसी की मजबूरी, किसी का मनोरंजन

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से: अश्लीलता का कारोबार- किसी की मजबूरी, किसी का मनोरंजन

समाज में धीरे-धीरे अश्लीलता की स्वीकारिता बढ़ती जा रही है। एक ओर जब हिजाब की बात हो रही हो, लड़कियों के पहनावे, जीवनशैली पर सवाल उठ रहे हैं, वही दूसरी तरह स्ट...

Continue reading

नई जनरेशन की नई चाहत-ना शादी, ना बच्चा

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से: नई जनरेशन की नई चाहत-ना शादी, ना बच्चा

-सुभाष मिश्रनई जनरेशन की शादी की कोई जल्दी नहीं है। यदि शादी हो भी जाए, तो बच्चा जल्दी नहीं चाहिए। देश में पहले नारा था— दो या तीन बस, फिर समय के साथ नारा बदल...

Continue reading