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राइजिंग बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल की नई पहचान

-सुभाष मिश्रविकास आखिर है क्या? क्या केवल चौड़ी सड़कें, ऊंची इमारतें, बड़े मॉल और औद्योगिक निवेश ही विकास के मा...

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राजपाट : प्रफुल्ल पारे

भुवन ना होते तो दारु भट्टी ना खुलतीआपको आशुतोष गोवारीकर की मशहूर फिल्म लगान का नायक भुवन (आमिर खान) तो याद ही होगा। वही भुवन जिसने अपने गांव चम्पानेर को तीन ग...

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कब बदलेगा किसान का धान पर से भरोसा

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ राज्य बने 25 वर्ष पूरे होने वाले हैं। इन 25 वर्षों में सरकारें बदलीं, राजनीतिक दल बदले, य...

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सुशासन तिहार : लोकसंवाद, जनकल्याण और जवाबदेही की कसौटी

-सुभाष मिश्रलोकतांत्रिक व्यवस्था में सुशासन केवल प्रशासनिक दक्षता का विषय नहीं होता, बल्कि यह जनता के प्रति संव...

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विपक्षी एकता : साथ भी और साथ के बाद भी संकट

-सुभाष मिश्र2014 के बाद भारतीय राजनीति में सबसे बड़ा परिवर्तन यह रहा कि भाजपा केवल एक पार्टी नहीं रही, बल्कि रा...

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भारत की जनसंख्या: क्या एलन मस्क की चेतावनी भविष्य का आईना है!

सुभाष मिश्रएक समय था जब भारत की सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती जनसंख्या को माना जाता था। हम दो, हमारे दो जैसे नारे सरका...

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विस अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज की जनधारा के पुस्तकों की सराहना की

साहित्यिक और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की अनुपम कृतिडॉक्टर रमन सिंह ने प्रधान संपादक सुभाष मिश्रा को आज की जनधारा बिलासपुर संस्करण के पांचवी वर्...

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बी.के.एस.रे की सहजता और सृजनशीलता की सबने की मुक्त कंठ से तारीफ की

पूर्व और वर्तमान आईएएस अधिकारियों ने श्री रे को दी श्रद्धांजलि

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हूज़ अफ्रेड ऑफ़ वर्जिनिया वुल्फ़? -सब डरते हैं

-सुभाष मिश्र1966 में एलिजाबेथ टेलर के फिल्म आई थी। जिस पर शरद जोशी ने मध्य प्रदेश की अफसरशाही पर एक व्यंग्य लिख...

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