साहित्यिक और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की अनुपम कृति
डॉक्टर रमन सिंह ने प्रधान संपादक सुभाष मिश्रा को आज की जनधारा बिलासपुर संस्करण के पांचवी वर्षगांठ पर दी बधाई
आत्मीय मुलाकात पर साहित्यक जगत पर हुई विस्तारपूर्वक चर्चा
रायपुर। विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह को शनिवार को उनके सरकारी आवास पर हिंदी दैनिक आज की जनधारा के प्रधान संपादक सुभाष मिश्रा ने अपने प्रकाशन समूह अभिव्यिक्त की प्रकाशित हमारा विरसा हमारी विरासत-भाग एक-अमर बलिदानी और स्वतंत्रता सेनानी, सन्त परम्परा और समाज सुधारक, साहित्य, कला, संस्कृति और लोक परम्परा की विरासत, राजनीति, पत्रकारिता और बलिदानी, साहित्यिक वार्षिकी पुस्तकें भेंट की। डॉक्टर रमन सिंह ने पुस्तकों के अवलोकन के उपरांत साहित्यक जगत पर उन्होंने विस्तार से चर्चा की। साथ ही उन्होंने आज की जनधारा बिलासपुर संस्करण के पांचवी वर्षगांठ पर प्रधान संपादक सुभाष मिश्रा को बधाई और शुभकामनाएं दिए। इस मौके पर उन्होंने कहा-वास्तव में आज के पत्रकारिता के दौर में आज की जनधारा अखबार समूह का छत्तीसगढ़ से जुड़े स्वतंत्रता सेनानी, संत परंपरा, समाज सुधारक जैसे अनेक महापुरुषों की जीवनी को एक नए सिरे से संजोना साथ ही सांस्कृतिक विरासत की ऐतिहासिक गाथा का प्रकाशन करना आज की पीढ़ी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस पुस्तक में प्रतिष्ठित इतिहासकार, पत्रकार, पुरात्वतिवदों के साथ-साथ महापुरूषों की जन्मस्थली से जुड़े अनुभवी स्थानीय लोगों के मतांतरों और ऐतिहासिक रिकार्ड के आधार पर एक वृहद शोध पर आधार पर लेखन किया गया है। उन्होंने कहा-आज पुस्तकों की अनुपम कृति को सिर्फ एक नजर में संदर्भ देखने मात्र से ही इसकी मौलिकता का मूल्य आने वाली पीढ़ी के लिए अमूल्य है।
विशद चर्चा के दौरान उन्होंने प्रकाशन समूह को छत्तीसगढ़ के बारे में अन्य विषयों पर आधारित पुस्तकों के प्रकाशन करने की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने कहा, हमने शासनकाल में छत्तीसगढ़ की पहचान को देश में फैलाने के लिए कई काम किए, उस दौर में आज की जनधारा की महती भूमिका निभाई। कहा-जब शोध करने वाली टीम उच्चस्तर के और अनुभवी हों तो पुस्तक नहीं वह समाज के लिए मूल्यवान हीरे के समान हैं। इस चर्चा के दौरान एक क्षण ऐसा भी आया, जब डॉक्टर रमन सिंह जी साहित्य जगत की चर्चा में डूब गए। छत्तीसगढ़ के महापुरूषों और सांस्कृतिक धरोहरों को संजोने की महती जरूरत बताते हुए अपने शासनकाल के दौरान हुए कार्यों को बताया। उन्होंने कहा, आज भी व्यस्तता के बीच जब भी मुझे जो समय मिलता है, तो मैं पुस्तकों को पढ़ता जरूर हूं। मैं आज की नई पीढ़ी यानी युवाओं से कहना चाहता हूं, मोबाइल से ज्यादा पुस्तकों के प्रति लगाव रखना चाहिए क्योंकि सत्य और प्रमाणिक तथ्य और इतिहास हमें पुस्तकों से ही मिलता है। इसलिए सभी को अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच पुस्तकों को पढ़ना चाहिए। डॉक्टर रमन सिंह ने आज की जनधारा की पुस्तकों को प्रदेश ही नहीं देश् के सभी स्कूल कालेजों में पढ़ाए जाने की आवश्यकता जताई, क्योंकि इसमें छत्तीसगढ़ की मूल भावना और सत्यता का प्रतिबिंब हैं और इन पुस्तकों को लाइब्रेरी में रखा जाने की आवश्यकता जताई।
डॉक्टर रमन सिंह ने कहा-इन पुस्तकों का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि इनमें छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक बहुलता का व्यापक प्रतिनिधित्व उपस्थित है। यहाँ आदिवासी समाज की संघर्षगाथाएँ भी हैं, ग्रामीण जनजीवन की चेतना भी है, संत परंपरा की आध्यात्मिक दृष्टि भी है और आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए किए गए संघर्ष भी हैं। इस प्रकार ये पुस्तकें केवल जीवनियाँ नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के बहुआयामी सांस्कृतिक इतिहास का जीवंत दस्तावेज बन जाती हैं। इसके अतिरिक्त यह पुस्तक श्रृंखला विद्यालयों में अनेक रचनात्मक गतिविधियों का आधार भी बन सकती है। इन पुस्तकों के आधार पर वाचन प्रतियोगिताएँ, परिचर्चाएँ, निबंध लेखन, प्रश्नोत्तरी, भाषण, नाट्य प्रस्तुति और सांस्कृतिक आयोजन किए जा सकते हैं। इस प्रकार विद्यार्थी केवल पाठक बनकर नहीं रहेंगे, वे सक्रिय सहभागिता के माध्यम से इतिहास और समाज को अधिक गहराई से समझ सकेंगे। शिक्षा तब अधिक प्रभावी होती है जब वह पुस्तक के पन्नों से निकलकर विद्यार्थियों के अनुभव संसार का हिस्सा बनती है।
उन्होंने कहा पूरे देश में छत्तीसगढ़ की सामाजिक , सांस्कृतिक , ऐतिहासिक , साहित्यिक और धार्मिक विरासत की विशेषताओं को महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक स्मृतियों, लोक चेतना और ऐतिहासिक अस्मिता का संसार अत्यंत व्यापक, बहुरंगी और गहन है। यह वह भूमि है जहाँ जंगलों की हरित निस्तब्धता के भीतर संघर्ष की अग्नि भी प्रज्वलित रही है और लोकगीतों की कोमल ध्वनियों के बीच आत्मबल, स्वाभिमान तथा जनप्रतिरोध की महान गाथाएँ भी जन्म लेती रही हैं। इस प्रदेश की मिट्टी में केवल धान की सुगंध ही नहीं, बल्कि शौर्य, त्याग, करुणा, विद्रोह, ज्ञान और लोकमंगल की असंख्य परंपराएँ भी रची बसी हुई हैं। यहाँ के वीर सेनानियों ने इतिहास को केवल देखा नहीं, उसे अपने रक्त और संकल्प से निर्मित किया है। यहाँ के स्वतंत्रता सेनानियों ने औपनिवेशिक अंधकार के विरुद्ध जनजागरण की मशालें प्रज्वलित कीं। यहाँ के संतों, समाज सुधारकों, साहित्यकारों, पत्रकारों और विदुषी महिलाओं ने समाज को नई दृष्टि, नई चेतना और नई नैतिक दिशा प्रदान की।