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दो कौड़ी का कौन? शिक्षक, मीडिया और समाज की बहस !

-सुभाष मिश्रहाल के दिनों में एक टीवी बहस के दौरान शिक्षकों को लेकर की गई एक टिप्पणी ने देशभर में नई बहस छेड़ दी...

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बस्तर का अगला अध्याय, बंदूक के बाद विकास की चुनौती

-सुभाष मिश्रबस्तर लंबे समय तक नक्सलवाद, हिंसा और सुरक्षा...

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गंगोत्री से गंगासागर तक : राजनीति की वही धारा, वही प्रदूषण

-सुभाष मिश्रभारतीय राजनीति में इन दिनों जो कुछ घटित हो रहा है, उसे देखकर ऐसा लगता है, मानो गंगोत्री से निकलकर ग...

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अबूझमाड़ अब अबूझ नहीं रहा

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में स्थित अबूझमाड़ वर्षों तक देश के सबसे दुर्गम, रहस्यमय और प्रशासनिक पहुंच...

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अधिकारी और नेताओं के द्वंद में जनमुद्दे गुम

-सुभाष मिश्रलोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारू और सुगम तरीके से चलाने के लिए विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि एक सेतु...

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मनोरंजन, बाजार और जुनून का नया नाम क्रिकेट

-सुभाष मिश्रक्रिकेट कभी अंग्रेजों के साथ भारत आया एक खेल था, लेकिन आज यह भारत में केवल खेल नहीं, बल्कि एक विशाल...

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स्याही से स्क्रीन तक की पत्रकारिता की यात्रा

-सुभाष मिश्रहिन्दी पत्रकारिता के दो सौ साल पूरे होने पर

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साहित्य, चिंतन और सृजन का संगम, 75वें वर्ष पर सम्मानित हुए बलराम जी

भारतीय ज्ञान परंपरा पर मंथन, साहित्यकारों की कृतियों का भव्य विमोचन

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मीडिया का वर्तमान परिदृश्य और चुनौतियां

-सुभाष मिश्रलोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता को समाज की आँख, कान और चेतना मानता है। मीडिया की दुनिया में बीते क...

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बढ़ती कंफर्ट इकॉनामी और उसके साइड इफेक्ट

-सुभाष मिश्रकभी एक दौर था जब बाजार तक पहुंचने के लिए इंसान को घर से निकलना पड़ता था। लोग सूची बनाकर किराना खरीद...

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