पार्टियों में टूट : विपक्ष की कमजोरी या सत्ता की रणनीति!

-सुभाष मिश्रभारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी बहुदलीय व्यवस्था रही है। अलग-अलग विचारधाराओं के अनेक दल भारत...

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दुनिया को पूँजीपति चला रहे हैं भ्रम या सच्चाई

-सुभाष मिश्रलोकतंत्र को अमीरों की जरूरत है या नहीं, यह सवाल आज पूरी दुनिया में नई तरह से उठ रहा है। दुनिया में ...

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राम नाम की लूट है… अयोध्या मंदिर में चढावे के चोरी का विवाद

राम नाम की लूट है… अयोध्या मंदिर में चढावे के चोरी का विवाद

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विपक्षी एकता : साथ भी और साथ के बाद भी संकट

-सुभाष मिश्र2014 के बाद भारतीय राजनीति में सबसे बड़ा परिवर्तन यह रहा कि भाजपा केवल एक पार्टी नहीं रही, बल्कि रा...

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भारत की जनसंख्या: क्या एलन मस्क की चेतावनी भविष्य का आईना है!

सुभाष मिश्रएक समय था जब भारत की सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती जनसंख्या को माना जाता था। हम दो, हमारे दो जैसे नारे सरका...

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हूज़ अफ्रेड ऑफ़ वर्जिनिया वुल्फ़? -सब डरते हैं

-सुभाष मिश्र1966 में एलिजाबेथ टेलर के फिल्म आई थी। जिस पर शरद जोशी ने मध्य प्रदेश की अफसरशाही पर एक व्यंग्य लिख...

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दो कौड़ी का कौन? शिक्षक, मीडिया और समाज की बहस !

-सुभाष मिश्रहाल के दिनों में एक टीवी बहस के दौरान शिक्षकों को लेकर की गई एक टिप्पणी ने देशभर में नई बहस छेड़ दी...

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गंगोत्री से गंगासागर तक : राजनीति की वही धारा, वही प्रदूषण

-सुभाष मिश्रभारतीय राजनीति में इन दिनों जो कुछ घटित हो रहा है, उसे देखकर ऐसा लगता है, मानो गंगोत्री से निकलकर ग...

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मनोरंजन, बाजार और जुनून का नया नाम क्रिकेट

-सुभाष मिश्रक्रिकेट कभी अंग्रेजों के साथ भारत आया एक खेल था, लेकिन आज यह भारत में केवल खेल नहीं, बल्कि एक विशाल...

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स्याही से स्क्रीन तक की पत्रकारिता की यात्रा

-सुभाष मिश्रहिन्दी पत्रकारिता के दो सौ साल पूरे होने पर

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