अब धर्मांतरण पड़ेगा महंगा

-सुभाष मिश्रधर्म, डर और विधेयक—छत्तीसगढ़ में यह तीनों शब्द अब केवल अवधारणाएँ नहीं, बल्कि एक साथ चल रही वास्तविक...

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परिसीमन: गणित का खेल या लोकतंत्र की नई पटकथा?

-सुभाष मिश्रदेश में परिसीमन की प्रक्रिया जिस तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है, उसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम केवल जनसंख्या के गणित के आधार पर ...

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झारखंड में सुरक्षाबलों की कार्रवाई तेज: मुठभेड़ में 4 नक्सली ढेर, टॉप कमांडर की तलाश जारी

जगदलपुर/झारखंड। झारखंड के हजारीबाग और छतरा जिले की सीमा से लगे जंगलों में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच चल रही मुठभेड़ में बड़ी सफल...

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परिसीमन: बढ़ती सीटें, सिकुड़ता संतुलन और सवालों के घेरे में नीयत

-सुभाष मिश्रभारत आज दुनिया की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है यह उपलब्धि कम, चुनौती अधिक है। सीमित भूगोल, सीमित ...

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भारतीय संविधान और बाबासाहेब अंबेडकर

-सुभाष मिश्रभारत के लोकतांत्रिक इतिहास में यदि किसी एक व्यक्ति ने विचार, संघर्ष और व्यवस्था तीनों स्तरों पर स्थायी छाप छोड़ी है, तो वह नाम है। दुर्भाग्य यह है...

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सुरों की वह लौ जो कभी नहीं बुझेगी

सुरों की वह लौ जो कभी नहीं बुझेगी

-सुभाष मिश्रआशा भोसले के निधन के साथ भारतीय संगीत जगत ने केवल एक महान गायिका को नहीं खोया, बल्कि एक पूरे युग को विदा होते देखा है। कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं जो...

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महिला आरक्षण: नीति, राजनीति और नीयत के बीच

-सुभाष मिश्रभारत की लोकतांत्रिक यात्रा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रश्न नया नहीं है, लेकिन हर बार यह प्...

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आस्था, परंपरा और अधिकार : क्या बहस भटक रही है?

-सुभाष मिश्रभारत सचमुच विविधताओं का देश है। यहाँ धर्म केवल पूजा की विधि नहीं, बल्कि जीवन का विस्तृत सांस्कृतिक ...

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युद्ध विराम या रणनीतिक विराम?

-सुभाष मिश्रपश्चिम एशिया में पिछले 40 दिनों से जारी तनाव के बाद ईरान, अमेरिका और इजऱायल के बीच 15 दिनों के युद्ध विराम (सीजफ़ायर) की सहमति पहली नजऱ में राहत की...

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खनन माफिया: नए डकैत और कमजोर पड़ता राज्य

-सुभाष मिश्रदेश की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में एक बेहद गंभीर टिप्पणी की—'खनन माफिया अब नए डकैत बन चुके हैं और ...

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