देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन अब पटरियों पर दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह ट्रेन न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यात्रियों को बहुत ही कम किराए में लग्जरी सफर का अनुभव देगी। जींद से दो स्टेशनों तक जाने के लिए यात्रियों को सिर्फ 10 रुपये खर्च करने होंगे। वहीं, सोनीपत से गोहाना के बीच भी किराया 10 रुपये ही रखा गया है। जींद से सोनीपत तक की पूरी यात्रा आप मात्र 25 रुपये में कर सकेंगे।
हाईटेक सुरक्षा और सुविधाएं
इस ट्रेन के कोच मेट्रो जैसी सुविधाओं से लैस हैं। इसमें हर स्टेशन की जानकारी देने के लिए डिस्प्ले बोर्ड और अनाउंसमेंट की व्यवस्था है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर कोच में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिन पर लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर नजर रखेंगे। ट्रेन में इमरजेंसी के दौरान लोको पायलट से बात करने के लिए बटन दिया गया है। कोच में तीन-तीन यात्रियों के बैठने की आरामदायक व्यवस्था है और खड़े होने के लिए पर्याप्त जगह भी छोड़ी गई है।

तकनीकी खूबियों का संगम
ट्रेन के इंजन में 210 किलो हाइड्रोजन गैस के साथ एक बैकअप बैटरी पैक भी है। अगर किसी कारण से गैस खत्म होती है, तो यह बैटरी की मदद से 60 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है। ट्रेन की अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। सुरक्षा के लिए इसमें 15 लीकेज सेंसर लगाए गए हैं जो गैस के रिसाव की तुरंत चेतावनी दे देते हैं। साथ ही तापमान को नियंत्रित रखने के लिए इसमें हीट सेंसर भी मौजूद हैं।
खास डिजाइन और ऑटो लॉक दरवाजे
ट्रेन के दरवाजों को बहुत मजबूती के साथ डिजाइन किया गया है। इसमें ऑटो लॉक सिस्टम है, जिससे चलती ट्रेन में दरवाजे खुलने का डर नहीं रहता। हर कोच में 4 स्लाइडिंग डोर लगाए गए हैं। दरवाजे के बीच में सुरक्षा के लिए लोहे की रॉड भी दी गई है। यह पूरी ट्रेन अभी नॉन-एसी है, जिसमें हवा के लिए खास पंखे लगाए गए हैं।