केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट धांधली मामले में विशेष अदालत में एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। इस खुलासे के बाद देश भर के छात्र और अभिभावक हैरान रह गए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार महाराष्ट्र के लातूर में कोचिंग सेंटर चलाने वाले संचालक ने परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र हासिल कर लिया था। इसके लिए आरोपी ने बकायदा 5 लाख रुपये की भारी रकम चुकाई थी। इस बड़े खुलासे के बाद से ही neet ug paper leak case को लेकर सुरक्षा और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच टीम ने आरोपी कोचिंग संचालक के मोबाइल से 132 हस्तलिखित प्रश्न बरामद किए हैं। इनमें से 111 प्रश्न सीधे परीक्षा के मुख्य प्रश्नपत्र से मेल खाते मिले हैं। यह परीक्षा 3 मई को देश भर के 551 शहरों में आयोजित की गई थी। इसमें लगभग 23 लाख छात्र शामिल हुए थे। हालांकि 7 मई को गड़बड़ी की सूचना मिलने के बाद 12 मई को यह परीक्षा रद्द कर दी गई थी। नतीजतन सरकार को दोबारा परीक्षा कराने का कड़ा फैसला लेना पड़ा था।
मामूली शिक्षक से ऐसे बना 1500 करोड़ का मालिक
आरोपी शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर पहले एक साधारण पार्ट टाइम शिक्षक के रूप में काम करता था। लेकिन आज उसकी कुल संपत्ति 1500 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। जांच एजेंसी का आरोप है कि उसका पेपर लीक करने वाले गिरोह से पुराना और गहरा नाता रहा है। वह मुख्य रूप से ऐसे अमीर परिवारों के बच्चों को निशाना बनाता था जो पढ़ाई में औसत स्तर के होते थे। परीक्षा के अंतिम 15 दिनों में वह इन छात्रों के लिए एक विशेष पर्सनल कोर्स चलाता था। इस दौरान उन्हें लीक हुए सवालों के जवाब सीधे रटवाए जाते थे।
देश भर में फैले नेटवर्क का हुआ भंडाफोड़
सीबीआई ने इस पूरे मामले में अब तक 13 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा बिहार पुलिस भी इस मामले में 30 लोगों को पहले ही जेल भेज चुकी है। जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था। आरोपी मोटेगांवकर एक ब्यूटीशियन के माध्यम से अन्य प्रोफेसरों के संपर्क में था। इस रैकेट में शामिल गुरुग्राम के एक युवक ने जयपुर के एक डीलर को यह पेपर बेचा था। उसे यह गोपनीय पेपर नासिक से एक अन्य आरोपी के जरिए मिला था। फिलहाल अदालत में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।