भारतीय संविधान और बाबासाहेब अंबेडकर

-सुभाष मिश्रभारत के लोकतांत्रिक इतिहास में यदि किसी एक व्यक्ति ने विचार, संघर्ष और व्यवस्था तीनों स्तरों पर स्थायी छाप छोड़ी है, तो वह नाम है। दुर्भाग्य यह है...

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सुरों की वह लौ जो कभी नहीं बुझेगी

सुरों की वह लौ जो कभी नहीं बुझेगी

-सुभाष मिश्रआशा भोसले के निधन के साथ भारतीय संगीत जगत ने केवल एक महान गायिका को नहीं खोया, बल्कि एक पूरे युग को विदा होते देखा है। कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं जो...

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महिला आरक्षण: नीति, राजनीति और नीयत के बीच

-सुभाष मिश्रभारत की लोकतांत्रिक यात्रा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रश्न नया नहीं है, लेकिन हर बार यह प्...

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आस्था, परंपरा और अधिकार : क्या बहस भटक रही है?

-सुभाष मिश्रभारत सचमुच विविधताओं का देश है। यहाँ धर्म केवल पूजा की विधि नहीं, बल्कि जीवन का विस्तृत सांस्कृतिक ...

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खनन माफिया: नए डकैत और कमजोर पड़ता राज्य

-सुभाष मिश्रदेश की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में एक बेहद गंभीर टिप्पणी की—'खनन माफिया अब नए डकैत बन चुके हैं और ...

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आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया: चुनावी रेवडिय़ों का बढ़ता जाल

सुभाष मिश्रदेश में चुनाव अब केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं रह गए हैं, बल्कि वे धीरे-धीरे वायदों की नीलामी में ...

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ट्रंप की ‘बौखलाहट’ और दुनिया की बेचैनी

-सुभाष मिश्रमिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच जिस तरह के बयान और फैसले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से...

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गिरता रुपया, बढ़ता दबाव: सबसे बड़ा बोझ आखिर किस पर?

-सुभाष मिश्रभारतीय अर्थव्यवस्था के मौजूदा परिदृश्य में रुपये की गिरती कीमत अब महज एक वित्तीय आंकड़ा नहीं रह गई ...

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अंधविश्वास, सत्ता और संगठित शोषण का त्रिकोण—जब विश्वास बन जाता है हथियार

-सुभाष मिश्रभारत में आस्था केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि सामाजिक संरचना का आधार रही है। लेकिन जब यही आस्था विव...

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डिजिटल जनगणना की नई शुरुआत: डेटा से तय होगा देश का भविष्य

-सुभाष मिश्रभारत में 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुई 'जनगणना 2027' केवल एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक निर्णायक मोड़ है। यह दे...

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