स्क्रीन का गुस्सा जमीन पर कैसे उतरेगा ?

-सुभाष मिश्र

देश के प्रधान न्यायाधीश के एक असावधान या राजनीतिज्ञों की भाषा में कहें तो राजनीति से प्रेरित अतिरेक का वक्तव्य एकाएक देश के युवाओं के प्रतिकार और आक्रोश का बड़ा कारण बन गया। आजकल जिस तरह से न्याय प्रक्रिया से जुड़े हुए लोगों को सत्ता उपकृत कर रही है और राज्यसभा से लेकर अनेक आयोगों के अध्यक्ष बना रही है या अन्य बड़े पद दे रही है उसके बीच यह उत्साही वक्तव्य कोई असहज नहीं करता है। लेकिन फिर भी यह तय है कि प्रधान न्यायाधीश महोदय ने यह वक्तव्य राजनीति से प्रेरित होकर या राजनीतिक आकांक्षा में नहीं दिया है। यह वक्तव्य क्षणिक आक्रोश में आया था। लेकिन फिर भी यह वक्तव्य युवाओं को बुरी तरह से चुभ गया। अब इस वक्तव्य के पीछे अनेक आशंकाएं जन्म ले रही हैं। क्या भारतीय जनता पार्टी वर्तमान में अनेक मुद्दों पर जैसे महंगाई, भ्रष्टाचार और सबसे बड़ा मुद्दा जो युवाओं से जुड़ा है-नीट के पेपर का परीक्षा से पहले खुल जाना। पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ जाना। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कथित किरकिरी या असफलताओं के चलते इस नई बनी कॉकरोच जनता पार्टी को खुद भारतीय जनता पार्टी हवा दे रही है। यह भी अफवाह है कि इसकी पूरी प्लानिंग भारतीय जनता पार्टी की है। लेकिन अभी कुछ स्पष्ट नहीं है। ये हवा में तीर भी हो सकते हैं। अफवाहों की कोई शक्ल नहीं होती है। लेकिन रातों-रात बनी इस कॉकरोच जनता पार्टी ने राजनीतिज्ञों की नींद उड़ा दी है। खासकर इसलिए कि इसमें युवा पीढ़ी या जेन जी शामिल है। जिसने बांग्लादेश और नेपाल में तख्ता पलट दिया और मात्र 2 दिन में 2 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स बन जाना एक ऐतिहासिक घटना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कॉकरोच जनता पार्टी सचमुच गंभीरता से बनी है तो उसे स्क्रीन की दुनिया से निकलकर हकीकत की दुनिया में आना होगा यथार्थ की जमीन पर पैर रखना होगा। यानी जो भी बदलाव या क्रांति करनी है, जमीन पर उतरकर करनी होगी। वरना इस आंदोलन की भी वैसे ही हवा निकलेगी जैसे अन्ना आंदोलन की निकली थी। अन्ना आंदोलन भी इसलिए असफल हुआ कि उसके पीछे कोई विचारधारा नहीं थी। अन्ना के पीछे सिर्फ भीड़ थी और भीड़ की कोई विचारधारा नहीं होती कोई शक्ल नहीं होती है। राजनीति के अधिकांश विशेषज्ञों का कहना है कि कॉकरोच जनता पार्टी यदि सचमुच कुछ करना चाहती है तो उसे अपनी एक आईडियोलॉजी सामने रखनी होगी। सिर्फ नारों से काम नहीं चलता है, सिर्फ व्यक्ति प्रतिरोध से काम नहीं होगा उसे पूरे सिस्टम के खिलाफ बात करनी होगी।
कॉकरोच जनता पार्टी महंगाई की, भ्रष्टाचार की, असमानता की और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ की बातें कर रही है और उनमें आक्रोश भी है। इस आक्रोश को सही दिशा मिलनी चाहिए। एक सुविचारित और सुचिंतित विचारधारा के साथ अपने आक्रोश को उन व्यक्तियों और सिस्टम को चिन्हित करना होगा जो इस सब व्यवस्था या दुर्व्यवस्था के लिए जिम्मेदार हैं। आक्रोश और राजनीतिक चेतना में फर्क होता है। आक्रोश को बहुत धैर्य और गहरे विचारों के साथ बदलाव की प्रक्रिया को जनता के विश्वास में बदलना होता है।
राजनीतिक सचेतक यह भी सोचते हैं कि कहीं यह पार्टी भाजपा के लिए सेफ्टी वॉल्व का काम तो नहीं करेगी?
अन्ना हजारे का उदाहरण बहुत से लोग दे रहे हैं। लेकिन यह याद रखना होगा कि उस समय भी अन्ना हजारे बहुत ही चुनिंदा मामलों में आंदोलन करते थे। महाराष्ट्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी सिलेक्टिव स्टेंड लेते थे और बहुत सारी चीजों से बचते थे। बाद में वे अपनी इन्हीं दोहरी नीतियों के कारण एक्सपोज हुए। आम आदमी पार्टी में जो लोग आए थे वह युवा आक्रोश और नई राजनीति के चेहरे के रूप में आये थे पर बाद में अधिकांश लोभ लालच, दबाव, डर और भय के कारण भाजपा की शरण में चले गए। उस समय आम जनता को आप पार्टी एक उम्मीद की तरह लगती थी। उनमें एक नया जज़्बा एक नया पैनापन था और लोगों को लग रहा था कि ये लोग कुछ नया करेंगे पर बाद में वही ढाक के तीन पात। क्योंकि इनके पास कोई राजनीतिक विचारधारा नहीं थी इसलिए कभी यह अंबेडकर जी की मूर्ति या फोटो लगा रहे थे, कभी भगत सिंह की और बाद में जो इनका आचरण रहा वह भी देखने वाला था। शाहीनबाग पर चुप्पी, बजरंगबली की जय, कभी राम मंदिर लोगों को लगा। इससे तो भले भाजपा वाले हैं जो खुलेआम वह सब कर रहे हैं जो वे चाहते है ।बहुत बार यह समझ में नहीं आता था कि ये लोग कांग्रेसी हैं कि भाजपाई? पर अब धीरे-धीरे लोगों की समझ में आया कि उनके पास कोई वैचारिक समझ नहीं थी। व्यवस्था के प्रति आकस्मिक आक्रोश को आप पार्टी ने अवसर की तरह देखा था। अब ठीक वही स्थिति बन रही है। युवा आक्रोश की अभिव्यक्ति के कारण सोशल मीडिया पर बनी यह जो कॉकरोच जनता पार्टी है। वह फिलहाल निश्चित रूप से युवाओं के भीतर जो कुछ पनप रहा है उसको हवा दे रही है पर विदेश में बैठकर इस तरह से पार्टी नहीं चलेगी। यदि जमीनी आंदोलन के लिए एक राजनीतिक फोरम में ज़मीनी स्तर पर बदलाव के लिए लोग नहीं आएंगे और वह भी एक राजनीतिक विचारधारा, स्पष्ट एजेंडे के तहत तो यह भी आंदोलन बहुत लंबा तो नहीं चलेगा ।
कॉकरोच जनता पार्टी के अधिकांश लीडर विदेश में है या यूं कहें की मुख्य कर्ताधर्ता विदेश में बैठे हैं तो भारत में जमीन पर उतरकर आंदोलन को कौन संभालेगा? कौन दिशा देगा? आज के समय में यही सबसे बड़ा प्रश्न है और कॉकरोच जनता पार्टी के लिए भी यही सबसे बड़ी चिंता होनी चाहिए!

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