अंधविश्वास, सत्ता और संगठित शोषण का त्रिकोण—जब विश्वास बन जाता है हथियार

-सुभाष मिश्रभारत में आस्था केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि सामाजिक संरचना का आधार रही है। लेकिन जब यही आस्था विव...

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डिजिटल जनगणना की नई शुरुआत: डेटा से तय होगा देश का भविष्य

-सुभाष मिश्रभारत में 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुई 'जनगणना 2027' केवल एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक निर्णायक मोड़ है। यह दे...

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नक्सलवाद की समाप्ति का दावा और सियासत की धार

नक्सलवाद की समाप्ति का दावा और सियासत की धार

-सुभाष मिश्रसंसद में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का हालिया बयान केवल एक सुरक्षा उपलब्धि का ब्योरा नहीं था, बल्कि उसमें सियासत की तीखी धार भी साफ दिखाई दी। उन्...

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तेज उड़ान की ओर भारत: कनेक्टिविटी से बदलती अर्थव्यवस्था की दिशा

-सुभाष मिश्रभारत का नागरिक उड्डयन क्षेत्र अब केवल हवाई यात्रा की सुविधा भर नहीं रह गया है; यह देश की बदलती अर्थ...

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क्या धर्म परिवर्तन को रोक पाएंगे न्यायालय और सरकार के फैसले

-सुभाष मिश्रधर्मांतरण, आरक्षण और आदिवासी समाज—इन तीनों के बीच खिंची महीन रेखा को हालिया न्यायिक और विधायी घटनाओ...

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बदलते बस्तर में उमड़ता जनसैलाब : शांति, विकास और चुनौती का संगम

-सुभाष मिश्रबस्तर आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां अतीत की छाया और भविष्य की संभावनाएँ आमने-सामने दिखाई देती हैं। दशकों तक नक्सल हिंसा और भय के पर्याय रहे इस क...

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धुरंधर 2: सिनेमा, सियासत और सनसनी के बीच फंसी एक ‘नैरेटिव फिल्म’

-सुभाष मिश्रनिर्देशक आदित्य धर की फिल्म धुरंधर: द रिवेंज आज सिर्फ एक फिल्म नहीं रह गई है, यह एक ऐसा आईना बन गई ...

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युद्ध की आग, ऊर्जा का संकट और हिलती वैश्विक अर्थव्यवस्था

-सुभाष मिश्र19 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार में आई 22 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट केवल एक वित्तीय घटना नहीं ह...

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धर्म, डर और विधेयक: छत्तीसगढ़ में कानून से ज्यादा संदेश क्यों हो गया है जरूरी

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक एक बार फिर पेश होने जा रहा है। पहली नजर में यह एक...

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चुनाव का खेला और विचारधारा की गिरती कीमत

-सुभाष मिश्रभारतीय लोकतंत्र में चुनाव को लोकतांत्रिक उत्सव कहा जाता है। लेकिन समय के साथ यह उत्सव कई बार एक ऐसे...

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