परिसीमन का नया फार्मूला: प्रतिनिधित्व बढ़ेगा या राजनीति बदलेगी?

-सुभाष मिश्रलोकसभा चुनाव 2029 अभी दूर है, लेकिन उसकी राजनीतिक बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष और व...

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जमीन खरीदी का खेल: विकास किसका, फायदा किसका?

-सुभाष मिश्र'सभी भूमि गोपाल की - भारतीय संस्कृति में यह वाक्य इस भावना को दर्शाता है कि धरती किसी एक व्यक्ति की...

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योग की वैश्विक स्वीकार्यता परंपरा से विश्व जीवनशैली तक

-सुभाष मिश्र21 जून को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रह गया है। यह उस विचार...

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महंगाई के बोझ तले किसान, बढ़ती लागत से खेती घाटे का सौदा

-सुभाष मिश्रकिसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। खेतों में पसीना बहाने वाला किसान ही करोड़ों लोगों की थाली तक ...

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दुनिया को पूँजीपति चला रहे हैं भ्रम या सच्चाई

-सुभाष मिश्रलोकतंत्र को अमीरों की जरूरत है या नहीं, यह सवाल आज पूरी दुनिया में नई तरह से उठ रहा है। दुनिया में ...

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राम नाम की लूट है… अयोध्या मंदिर में चढावे के चोरी का विवाद

राम नाम की लूट है… अयोध्या मंदिर में चढावे के चोरी का विवाद

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विपक्षी एकता : साथ भी और साथ के बाद भी संकट

-सुभाष मिश्र2014 के बाद भारतीय राजनीति में सबसे बड़ा परिवर्तन यह रहा कि भाजपा केवल एक पार्टी नहीं रही, बल्कि रा...

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भारत की जनसंख्या: क्या एलन मस्क की चेतावनी भविष्य का आईना है!

सुभाष मिश्रएक समय था जब भारत की सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती जनसंख्या को माना जाता था। हम दो, हमारे दो जैसे नारे सरका...

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हूज़ अफ्रेड ऑफ़ वर्जिनिया वुल्फ़? -सब डरते हैं

-सुभाष मिश्र1966 में एलिजाबेथ टेलर के फिल्म आई थी। जिस पर शरद जोशी ने मध्य प्रदेश की अफसरशाही पर एक व्यंग्य लिख...

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दो कौड़ी का कौन? शिक्षक, मीडिया और समाज की बहस !

-सुभाष मिश्रहाल के दिनों में एक टीवी बहस के दौरान शिक्षकों को लेकर की गई एक टिप्पणी ने देशभर में नई बहस छेड़ दी...

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