Editor-in-Chief सुभाष मिश्र

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – सेना को खुली छूट, भारत की भावना का प्रकटीकरण

-सुभाष मिश्रयुद्ध का मैदान हो या फिर सीमा की सुरक्षा ये काम सेना का है पर हमारे देश में सेना को वैसी खुली छूट नहीं है जैसी पाकिस्तान में। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – ओटीटी और सोशल मीडिया में अश्लील कंटेंट एक राष्ट्रीय चिंता

-सुभाष मिश्रसुप्रीम कोर्ट ने अश्लील कंटेंट को सामाजिक और नैतिक खतरे के रूप में देखा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 28 अप्रैल 2025 को केंद्र, ओटीटी और सोशल मीडिया प्लेटफॉम्र्स को नोटि...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – संविधान बचाओ यात्रा और राष्ट्रीय बहस

-सुभाष मिश्र भारतीय संविधान, जिसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया, देश का सर्वोच्च दस्तावेज है जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल्यों पर आधारित है। हाल ही में भारतीय ...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – विकास की रफ्तार और भ्रष्टाचार का साया

-सुभाष मिश्रभारत आज विकास के जिस सुनहरे दौर से गुजर रहा है, वह अभूतपूर्व है। सड़कें, रेल, बंदरगाह और स्मार्ट शहर हर क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है। भारतमाला पर...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – आतंकवाद और नक्सलवाद के खात्में की अंतिम लड़ाई

-सुभाष मिश्रदेश के आंतरिक और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाली करने के उद्देश्य से इस समय एक साथ बड़ी कार्रवाई चल रही है। एक ओर कश्मीर के पहलगाम मे...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – पहलगाम आतंकी हमले के पीछे छिपे मंसूबे

-सुभाष मिश्रजम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की मौत हुई, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। यह 2019 के पुलवामा हमले के बाद कश्मीर में सबसे घातक ...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – सुप्रीम कोर्ट और उससे जुड़ी टिप्पणियां

-सुभाष मिश्रसुप्रीम कोर्ट अपने फैसलों की वजह से चर्चा में रहती है। हमारी जनतांत्रिक व्यवस्था में संविधान सर्वोच्च है और संविधान की मूल भावना के अनुरूप कामकाज, निर्णय हो रहे हैं...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – बहुत मजबूत हैं जातिगत जड़ें

-सुभाष मिश्रहम लाख कहें कि जाति पाति पूछे ना कोई, हरि को भजै सो हरि का होई। या जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान। मोल करो तलवार का , पड़ा रहन दो म्यान।। हमारे बहुत सारे म...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – जानलेवा तन्हाई, अकेलापन और अवसाद

-सुभाष मिश्रमशहूर शायर निदा फ़ाज़ली की गज़़ल के शेर हैं- हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी। सुब्ह से शाम तक बोझ ढोता हुआ अपनी ही लाश का ख़ुद मज़ार आ...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – न्याय ,पक्ष में होता तो अच्छा, नहीं तो खराब

-सुभाष मिश्रहमारी जनतांत्रित व्यवस्था में न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका की भूमिका बंटी हुई है। संविधान में निहित प्रावधानों और व्यवस्थाओं के तहत सभी अपने अपने दायरे में ...

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