जेल: सुधार गृह या यातना गृह?

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल ने जेल से बाहर आने के बाद जो आरोप लग...

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धान का कटोरा और खनिज की धरती, संतुलन ही सुशासन की असली कसौटी

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की राजनीति में धान केवल एक फसल नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, समाज और सत्ता तीनों का केंद्र है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ...

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सत्ता के साये में अपमान की संस्कृति

-सुभाष मिश्रकिसी एक अधिकारी के निलंबन या किसी एक घटना को लेकर उठी हलचल अक्सर कुछ दिनों में थम जाती है, लेकिन उस...

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चुनाव, छापे और लोकतंत्र

-सुभाष मिश्रभारतीय लोकतंत्र में चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं होते हैं। वे जनता की आशाओं, अपेक्षा...

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सरकार की प्राथमिकता में बस्तर

सरकार की प्राथमिकता में बस्तर

-सुभाष मिश्रकेंद्र में भाजपा सरकार हो या छत्तीसगढ़ में, इन दिनों यदि किसी एक भू-भाग पर सबसे अधिक राजनीतिक, प्रशासनिक और सुरक्षा स्तर की गतिविधियाँ केंद्रित दि...

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हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियाँ: बड़ी देर कर दी मेहरबान, आते-आते

-सुभाष मिश्रप्रदेश की 32 हाउसिंग बोर्ड कॉलोनियों में रहने वाले 40 हजार से अधिक परिवारों के लिए बड़ा बदलाव प्रस्...

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टैरिफ घटा, तेवर नहीं: ट्रम्प की डील और भारत की दुविधा

सुभाष मिश्रभारत और अमेरिका के बीच जिस ट्रेड डील को लेकर लंबे समय से बातचीत च...

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खेल के मैदान में सत्ता की सियासत

खेल के मैदान में सत्ता की सियासत

-सुभाष मिश्रदरअसल, खेल को राजनीति से अलग रखने की बात जितनी बार दोहराई जाती है, उतनी ही बार वह झूठ साबित होती है। ओलंपिक से लेकर विश्व कप तक, हर बड़ा खेल आयोजन...

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क्या बजट जनता की उम्मीदों का आईना होगा

-सुभाष मिश्र1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला बजट सिर्फ सरकार का सालाना हिसाब-किताब नहीं है, बल्कि यह उस आम जनता की...

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अजब-गज़़ब चोरी : जब अपराध ने नैतिकता और मानवता की सीमाएँ लांघ दी

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की लोक-सांस्कृतिक स्मृति में हबीब तनवीर का नाटक 'चरणदास चोर आज भी जीवित है। वह चोर, जो चो...

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