आस्था, परंपरा और अधिकार : क्या बहस भटक रही है?

-सुभाष मिश्रभारत सचमुच विविधताओं का देश है। यहाँ धर्म केवल पूजा की विधि नहीं, बल्कि जीवन का विस्तृत सांस्कृतिक ...

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खनन माफिया: नए डकैत और कमजोर पड़ता राज्य

-सुभाष मिश्रदेश की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में एक बेहद गंभीर टिप्पणी की—'खनन माफिया अब नए डकैत बन चुके हैं और ...

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आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया: चुनावी रेवडिय़ों का बढ़ता जाल

सुभाष मिश्रदेश में चुनाव अब केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं रह गए हैं, बल्कि वे धीरे-धीरे वायदों की नीलामी में ...

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ट्रंप की ‘बौखलाहट’ और दुनिया की बेचैनी

-सुभाष मिश्रमिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच जिस तरह के बयान और फैसले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से...

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गिरता रुपया, बढ़ता दबाव: सबसे बड़ा बोझ आखिर किस पर?

-सुभाष मिश्रभारतीय अर्थव्यवस्था के मौजूदा परिदृश्य में रुपये की गिरती कीमत अब महज एक वित्तीय आंकड़ा नहीं रह गई ...

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अंधविश्वास, सत्ता और संगठित शोषण का त्रिकोण—जब विश्वास बन जाता है हथियार

-सुभाष मिश्रभारत में आस्था केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि सामाजिक संरचना का आधार रही है। लेकिन जब यही आस्था विव...

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डिजिटल जनगणना की नई शुरुआत: डेटा से तय होगा देश का भविष्य

-सुभाष मिश्रभारत में 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुई 'जनगणना 2027' केवल एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक निर्णायक मोड़ है। यह दे...

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नक्सलवाद की समाप्ति का दावा और सियासत की धार

नक्सलवाद की समाप्ति का दावा और सियासत की धार

-सुभाष मिश्रसंसद में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का हालिया बयान केवल एक सुरक्षा उपलब्धि का ब्योरा नहीं था, बल्कि उसमें सियासत की तीखी धार भी साफ दिखाई दी। उन्...

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तेज उड़ान की ओर भारत: कनेक्टिविटी से बदलती अर्थव्यवस्था की दिशा

-सुभाष मिश्रभारत का नागरिक उड्डयन क्षेत्र अब केवल हवाई यात्रा की सुविधा भर नहीं रह गया है; यह देश की बदलती अर्थ...

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क्या धर्म परिवर्तन को रोक पाएंगे न्यायालय और सरकार के फैसले

-सुभाष मिश्रधर्मांतरण, आरक्षण और आदिवासी समाज—इन तीनों के बीच खिंची महीन रेखा को हालिया न्यायिक और विधायी घटनाओ...

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