क्या धर्म परिवर्तन को रोक पाएंगे न्यायालय और सरकार के फैसले

-सुभाष मिश्रधर्मांतरण, आरक्षण और आदिवासी समाज—इन तीनों के बीच खिंची महीन रेखा को हालिया न्यायिक और विधायी घटनाओ...

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बदलते बस्तर में उमड़ता जनसैलाब : शांति, विकास और चुनौती का संगम

-सुभाष मिश्रबस्तर आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां अतीत की छाया और भविष्य की संभावनाएँ आमने-सामने दिखाई देती हैं। दशकों तक नक्सल हिंसा और भय के पर्याय रहे इस क...

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धुरंधर 2: सिनेमा, सियासत और सनसनी के बीच फंसी एक ‘नैरेटिव फिल्म’

-सुभाष मिश्रनिर्देशक आदित्य धर की फिल्म धुरंधर: द रिवेंज आज सिर्फ एक फिल्म नहीं रह गई है, यह एक ऐसा आईना बन गई ...

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युद्ध की आग, ऊर्जा का संकट और हिलती वैश्विक अर्थव्यवस्था

-सुभाष मिश्र19 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार में आई 22 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट केवल एक वित्तीय घटना नहीं ह...

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धर्म, डर और विधेयक: छत्तीसगढ़ में कानून से ज्यादा संदेश क्यों हो गया है जरूरी

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक एक बार फिर पेश होने जा रहा है। पहली नजर में यह एक...

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चुनाव का खेला और विचारधारा की गिरती कीमत

-सुभाष मिश्रभारतीय लोकतंत्र में चुनाव को लोकतांत्रिक उत्सव कहा जाता है। लेकिन समय के साथ यह उत्सव कई बार एक ऐसे...

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पांच राज्यों के चुनाव: किसकी शह, किसकी मात?

-सुभाष मिश्रदेश में एक बार फिर लोकतांत्रिक उत्सव की शुरुआत हो गई है। इलेक्शन कमीशन आफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल, अ...

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खाड़ी युद्ध और गैस का संकट: वैश्विक आग की तपिश घर तक

-सुभाष मिश्रकवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता है -यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में आग लगी होक्या तुमदूसरे कमरे ...

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नई किस्म का फसल चक्र परिवर्तन

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से लगातार छत्तीसगढ़ जिसे धान का कटोरा कहा जाता है ,वहां पर फसल चक्र परि...

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आधी आबादी की मेहनत: क्या सचमुच सशक्तिकरण की ओर बढ़ रहे हैं कदम?

-सुभाष मिश्रअभी हाल ही में हमने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर काफी बात...

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