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भारतमाला या भारत-घोटाला?

-सुभाष मिश्रकश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत की एकता का नारा अक्सर गर्व से भरा हुआ सुनाई देता है। लेकिन अगर उसी वाक्य को व्यंग्य की दृष्टि से पढ़ें, तो यह एक और ...

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राजपाट – प्रफुल्ल पारे

पाठक ने बढ़ाई भाजपाइयों की चिंता

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मई दिवस: संघर्ष की विरासत और बिखरता वर्तमान

-सुभाष मिश्रमैं आज मई दिवस पर यह कहने की हिम्मत नहीं कर पा रहा हूं कि 'दुनिया के मजदूर एक हो। न ही यह कह सकता ह...

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एग्जिट पोल : किसको वोट, किसको चोट?

-सुभाष मिश्रपांच राज्यों में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं और अब सबकी नजर नतीजों से पहले आने वाले एग्जिट पो...

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डीपफेक की राजनीति: जब झूठ तकनीक बनकर लोकतंत्र पर चढ़ बैठता है

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़ा कथित एआई जनरेटेड वीडियो विवाद किसी एक नेता या द...

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वाणी का संयम खोने का बढ़ता रिवाज

वाणी का संयम खोने का बढ़ता रिवाज

-सुभाष मिश्रभारतीय परंपरा में वाणी को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र का दर्पण माना गया है। कबीर, रहीम, तुलसीदास और गुरु नानक जैसे संतों ने बार-ब...

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‘आप’ ऐसे तो न थे

-त्वरित टिप्पणी- सुभाष मिश्रराजनीति में उम्मीदें बार-बार टूटती हैं, लेकिन कुछ टूटनें सिर्फ राजनीतिक नहीं होतीं,...

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कमतर सुरक्षा के जरिए विकास की कीमत चुकता छत्तीसगढ़

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ आज देश के औद्योगिक नक्शे पर तेजी से उभरता हुआ राज्य है। चूना पत्थर, लौह अयस्क, डोलोमाइट औ...

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‘राजपाट’

-वरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल पारेवरिष्ठ पत्रकार प्रफुल्ल पारे 'आज की जनधारा' में हर शनिवार एक विशेष कॉलम 'राजपाट' ल...

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क्या छत्तीसगढ़ बनेगा “खेलगढ़”? – उभरती संभावनाओं, मजबूत ढांचे और अधूरे सवालों का सच

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ अब केवल खनिज, वन और सांस्कृतिक विविधता का प्रदेश भर नहीं रह गया है; वह तेजी से खेलों के मानचित्र पर अपनी अलग पहचान गढ़ने की दिशा में बढ़...

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