छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से एनएचएम एकाउंटेंट को बड़ी राहत: बिना नोटिस सेवा समाप्ति का आदेश निरस्त

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत एकाउंटेंट हरनारायण कुम्भकार की सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने साफ कहा कि किसी भी कर्मचारी को बिना कारण बताओ नोटिस दिए और बिना उसका पक्ष सुने नौकरी से निकालना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के बिल्कुल खिलाफ है।

पूरा मामला कोरबा जिले का है। याचिकाकर्ता हरनारायण कुम्भकार वहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में एकाउंटेंट के पद पर तैनात थे। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कोरबा ने कार्रवाई करते हुए 6 मई 2026 को उनकी सेवाएं अचानक समाप्त कर दी थीं। इस एकतरफा आदेश के खिलाफ हरनारायण ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और रिट याचिका दायर की।

अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील श्रीकांत कौशिक ने मजबूत पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि नौकरी से निकालने से पहले उनके मुवक्किल को कोई नोटिस नहीं दिया गया। अपनी बात रखने का मौका भी नहीं मिला। वकील ने एनएचएम की मानव संसाधन नीति-2018 का हवाला देते हुए कहा कि अगर किसी कर्मचारी का काम ठीक नहीं है, तो भी उसे हटाने से पहले सुनवाई का अवसर देना नियम के तहत अनिवार्य है।

दूसरी तरफ सरकारी और एनएचएम के वकीलों ने विभाग की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने दलील दी कि एकाउंटेंट को काम में सुधार के लिए पहले भी टोका गया था, लेकिन सुधार न होने पर ही यह एक्शन लिया गया।

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जस्टिस बी.डी. गुरु ने मामले से जुड़े दस्तावेजों को देखा। कोर्ट ने पाया कि कर्मचारी को अपनी बात रखने का सही मौका नहीं मिला और तय प्रक्रिया की अनदेखी की गई। अदालत ने सीएमएचओ कोरबा के 6 मई 2026 के आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया और याचिका मंजूर कर ली। इस फैसले से संविदा और मिशन के तहत काम करने वाले कर्मचारियों में खुशी है।

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