तेवर‌ दिखा‌ रही गोबर खाद…

गौशालाओं और डेयरियों में पहुंची खरीफ की तैयारियों की मांग

राजकुमार मल

भाटापारा- जैविक खाद शून्य। मुर्गी खाद थोड़ा-थोड़ा लेकिन तेवर दिखा रही गोबर खाद। रिकॉर्ड 200 से 300 रुपए की तेजी के बाद इसकी खरीदी अब 1300 से 1500 रुपए प्रति ट्रॉली पर करनी होगी।

रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता में आ रही दिक्कतों को देखकर परंपरागत खाद का छिड़काव आगत खरीफ सत्र में बढ़ने के आसार प्रबल होते नजर आ रहे हैं। खरीदी को लेकर बढ़ते रुझानों के बाद गौशाला, गौधाम और डेयरियों ने एकाएक कीमतें बढ़ा दी हैं, तो पोल्ट्री फार्मों ने भी मुर्गी खाद के भाव बढ़ा दिए हैं


तेवर गोबर के

बेहद असरदार होती है गोबर खाद। भूमि की नमी और उर्वरा शक्ति बनाए रखता है निरंतर छिड़काव। लेकिन रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता ने इसका उपयोग सीमित कर दिया है। अरसे बाद अब इसमें मांग बढ़ने के प्रबल संकेत मिल रहे हैं क्योंकि रासायनिक उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता पर संकट के बादल छा चुके हैं। ऐसे में यह प्रति ट्रॉली 1300 से 1500 रुपए पर जा पहुंची है। बढ़त के संकेत अभी से मिलने लगे हैं।


मुर्गी खाद थोड़ा-थोड़ा

छिड़काव के बाद परिणाम जोरदार लेकिन उपयोग करने वाले किसान बेहद कम। खरीदी को लेकर हल्की पूछताछ के बाद इसमें प्रति ट्रॉली कीमत 1200 से 1300 रुपए बोली जाने लगी है लेकिन उत्साहजनक नहीं मानी जा रही है मुर्गी खाद में खरीदी। ऐसी स्थितियों में कीमत स्थिर रहने या फिर गिरावट के आसार हैं। मालूम हो कि बीते खरीफ सत्र में यह 1100 से 1200 रुपए प्रति ट्रॉली पर स्थिर थी।


ऑर्डर पर लगा हुआ है ब्रेक

जैविक खाद के बेहतर परिणाम के बावजूद इसकी खरीदी को लेकर किसान अभी भी एक मत नहीं हैं। बेहद कमजोर मांग के बाद कृषि आदान विक्रेता संस्थानों ने अगाऊ सौदे से दूरी बनाई हुई है। रही- सही कसर उत्पादक कंपनियों की सुस्त कार्यशैली पूरी कर रही है, जिसमें खरीफ सत्र के लिए नई कीमत की जानकारी संस्थानों तक नहीं पहुंचाए जाने जैसी स्थितियां मुख्य वजह मानी जा रहीं हैं।

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