विराट सराफ अपहरण कांड: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपियों की उम्रकैद की सजा बरकरार, अपील खारिज

Virat Saraf Kidnapping Case Update: बिलासपुर के सबसे चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले मासूम विराट सराफ अपहरण कांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के आरोपियों की सजा के खिलाफ दायर की गई अपील को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को सही ठहराया है। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि सरकारी वकील ने वैज्ञानिक और पुख्ता सबूतों से यह साबित कर दिया है कि आरोपियों ने पूरी साजिश रचकर फिरौती के लिए ही बच्चे का किडनैप किया था।

मास्टरमाइंड निकली थी खुद की बड़ी मां, 6 करोड़ की मांगी थी फिरौती यह दिल दहला देने वाली घटना 20 अप्रैल 2019 की है। कश्यप कॉलोनी के रहने वाले कारोबारी विवेक सराफ का बेटा विराट अपने दोस्तों के साथ घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान आरोपियों ने उसका मुंह दबाया और वैगन-आर कार में अगवा कर लिया। बाद में उसे दूसरी डस्टर कार में शिफ्ट कर जरहाभाटा के एक मकान में हाथ-पैर बांधकर बंद कर दिया गया। अपहरणकर्ताओं ने बच्चे की आवाज मोबाइल में रिकॉर्ड की और परिजनों से 6 करोड़ रुपये की भारी-भरकम फिरौती मांगी। बिलासपुर पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स के जरिए जो सच सामने आया, उसने सबको चौंका दिया। इस पूरे अपहरण कांड की मास्टरमाइंड बच्चे की सगी बड़ी मां नीता सराफ निकली।

CCTV और कॉल रिकॉर्डिंग की कड़ियों ने खोला राज हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि आरोपियों के खिलाफ गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल टावर लोकेशन, आईएमईआई लिंकेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) जैसी कड़ियां आपस में पूरी तरह जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा फोरेंसिक और फिंगरप्रिंट की रिपोर्ट से भी साबित हुआ कि यह एक सोची-समझी क्रिमिनल साजिश थी।

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद, हाईकोर्ट ने कहा- कोई राहत नहीं इस मामले में पुलिस ने बड़ी मां नीता सराफ, राजकिशोर, अनिल, सतीश और हरेकृष्ण को गिरफ्तार किया था। निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने इन्हें दोषी पाते हुए आपराधिक साजिश (120-B) और फिरौती के लिए अपहरण (364-A) जैसी गंभीर धाराओं के तहत उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट ने भी इस पर मुहर लगा दी है कि समाज में मासूम बच्चों के साथ ऐसा खौफनाक जुर्म करने वालों को कोई राहत नहीं दी जा सकती।

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