धर्मांतरण: आस्था, प्रलोभन या संगठित तंत्र?

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का प्रश्न कोई नया विषय नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में सामने आए तथ्यों ने इ...

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क्या भ्रष्टाचार पर अंकुश संभव है?

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से: क्या भ्रष्टाचार पर अंकुश संभव है?

-सुभाष मिश्रभारत में भ्रष्टाचार अब केवल नैतिक पतन या व्यक्तिगत लालच का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह एक संस्थागत संकट का रूप ले चुका है। सुप्रीम कोर्ट का भ्र...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से: अश्लीलता का कारोबार- किसी की मजबूरी, किसी का मनोरंजन

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से: अश्लीलता का कारोबार- किसी की मजबूरी, किसी का मनोरंजन

समाज में धीरे-धीरे अश्लीलता की स्वीकारिता बढ़ती जा रही है। एक ओर जब हिजाब की बात हो रही हो, लड़कियों के पहनावे, जीवनशैली पर सवाल उठ रहे हैं, वही दूसरी तरह स्ट...

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नई जनरेशन की नई चाहत-ना शादी, ना बच्चा

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से: नई जनरेशन की नई चाहत-ना शादी, ना बच्चा

-सुभाष मिश्रनई जनरेशन की शादी की कोई जल्दी नहीं है। यदि शादी हो भी जाए, तो बच्चा जल्दी नहीं चाहिए। देश में पहले नारा था— दो या तीन बस, फिर समय के साथ नारा बदल...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – लालच के आगे हारता विवेक

-सुभाष मिश्रभारतेंदु हरिश्चंद्र ने अंधेर नगरी के गीत में बहुत पहले जिस वाक्य को लगभग चेतावनी की तरह रखा था 'लोभ पाप का मूल है। आज वही वाक्य हमारे समय की सबसे ...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – धान के गोदामों में चूहे और तंत्र का सच

-सुभाष मिश्रकई बार मन में यह ख्याल आता है कि यदि चूहे नहीं होते, दीमक नहीं होती, सरकारी दफ्तरों में दैवीय प्रको...

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एसआईआर: मतदाता सूची का शुद्धिकरण या लोकतंत्र की परीक्षा?

-सुभाष मिश्रउत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की ड्राफ्ट मतदाता सूची सामने आते ही लोकतंत्र के सबसे बुनियादी आधार—मतदाता—पर ही सवाल खड़े हो गए ह...

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मनरेगा पर नया प्रयोग: ग्रामीण रोजग़ार, नीति और राजनीति

मनरेगा पर नया प्रयोग: ग्रामीण रोजग़ार, नीति और राजनीति

दिसंबर 2025 में संसद द्वारा वीबी-जी-राम-जी अधिनियम का पारित होना केवल एक नई ग्रामीण योजना की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह भारत की सामाजिक नीति, संघीय ढांचे और राज...

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दूषित पानी नहीं, दूषित तंत्रसबसे स्वच्छ शहर इंदौर से उठता असहज सवाल

-सुभाष मिश्रइंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर। लगातार वर्षों से स्वच्छता रैंकिंग में प्रथम। जिसे मॉडल कहा गया, जिसे ब्रांड बनाया गया, जिसे शासन-प्रशासन की सफलता का...

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क्रिकेट के बहाने बंगाल में ‘नया खेला’ शाहरुख़ ख़ान, राष्ट्रवाद और चुनावी उन्माद

-सुभाष मिश्रभारत में जब भी चुनाव नज़दीक आते हैं, तब राजनीति अपने सबसे आसान औज़ार निकाल लेती है धर्म, राष्ट्रवाद...

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