मध्य पूर्व में भीषण जंग: इजरायल ने 24 घंटे में किए 230 हवाई हमले, ट्रंप आज रात करेंगे युद्ध समाप्ति पर बड़ा संबोधन

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के 33वें दिन इजरायली वायुसेना ने ईरान के विरुद्ध अपने सैन्य अभियान को और अधिक तीव्र कर दिया है। इजरायल का दावा है कि बीते 24 घंटों के भीतर ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में 230 से अधिक हवाई हमले किए गए हैं। इसी क्रम में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें ईरान के भूमिगत सैन्य ठिकानों पर प्रिसिजन म्यूनिशन से की गई सटीक बमबारी दिखाई गई है। इजरायल के अनुसार, इन सुनियोजित हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को पूर्णतः पंगु बनाना है। दूसरी ओर, ईरान ने इन हमलों में रिहायशी इलाकों और आम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक ईरान के 4,770 सुरक्षाकर्मियों की मृत्यु हो चुकी है और 21,000 से अधिक लोग घायल हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप का संबोधन और युद्ध विराम का दावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज रात 9:00 बजे राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं। इससे पूर्व ओवल ऑफिस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के साथ जारी यह युद्ध अगले 2 से 3 हफ्तों में समाप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का प्राथमिक लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना था, जो अब लगभग पूर्ण हो चुका है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना केवल अमेरिका का उत्तरदायित्व नहीं है और अन्य देशों को भी अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की है कि ट्रंप का संबोधन ईरान ऑपरेशन के अंतिम चरण पर केंद्रित होगा।

चीन और पाकिस्तान का पांच सूत्री शांति प्रस्ताव क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए चीन और पाकिस्तान ने एक संयुक्त शांति योजना प्रस्तुत की है। बीजिंग में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने पांच सूत्री सीजफायर प्लान जारी किया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य तत्काल युद्ध विराम सुनिश्चित करना और वार्ता के माध्यम से विवाद का समाधान निकालना है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता संकट यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) ने इस युद्ध के आर्थिक प्रभावों पर एक चिंताजनक रिपोर्ट साझा की है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष से मध्य पूर्व की अर्थव्यवस्था को लगभग 18 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। क्षेत्र की जीडीपी में 3.7 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही 70 प्रतिशत तक घटने के कारण कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। UNDP ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध तत्काल नहीं रुका, तो क्षेत्र में 16 लाख से 36 लाख लोगों की नौकरियां जा सकती हैं।

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