तेहरान/वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक अभूतपूर्व और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दुनिया की दिग्गज अमेरिकी तकनीकी और एयरोस्पेस कंपनियों को सीधे तौर पर हमले की धमकी दी है। ईरान की इस प्राथमिक सैन्य इकाई ने मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप), गूगल और एप्पल जैसी कंपनियों के स्टाफ को निर्देश दिया है कि वे क्षेत्र में स्थित अपने कार्यालयों को तुरंत खाली कर दें। ईरान का आरोप है कि सिलिकॉन वैली की ये कंपनियां उन आधुनिक युद्ध प्रणालियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए जिम्मेदार हैं, जिनका उपयोग ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
आज रात 8 बजे से कार्रवाई का अल्टीमेटम
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम के माध्यम से जारी बयान के अनुसार, आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि 1 अप्रैल यानी आज स्थानीय समय के अनुसार रात 8:00 बजे से इन अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया जाएगा। सैन्य विंग ने न केवल कर्मचारियों बल्कि इन कॉर्पोरेट परिसरों के आसपास रहने वाले आम नागरिकों से भी तत्काल इलाका खाली करने की अपील की है। ईरान का दावा है कि अब युद्ध केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन तकनीकी संस्थानों तक भी पहुंचेगा जिन्हें वह इस पूरे संघर्ष का हिस्सा मानता है।
एआई और हाई-टेक वॉरफेयर को बताया हमले का कारण
आईआरजीसी ने स्पष्ट किया है कि उसका ध्यान अब पारंपरिक सैन्य बुनियादी ढांचे से हटकर उन कंपनियों पर है जो टारगेट की पहचान करने के लिए एआई और सैटेलाइट ट्रैकिंग का उपयोग कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की ‘हिट लिस्ट’ में 18 से अधिक हाई-प्रोफाइल कंपनियां शामिल हैं। इनमें मेटा, गूगल और एप्पल के अलावा बोइंग, टेस्ला, इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट, ओरेकल और चिप निर्माता कंपनी एनवीडिया जैसे नाम शामिल हैं। ईरान का आरोप है कि ये संस्थाएं अमेरिकी इंटेलिजेंस और इजरायल के ऑपरेशन्स को तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही हैं।
लक्ष्य केंद्रित हत्याओं के खिलाफ सख्त रुख
बयान में आगे कहा गया है कि यदि भविष्य में किसी अन्य ईरानी नेता की ‘टारगेटेड हत्या’ की जाती है, तो ये हमले तुरंत शुरू कर दिए जाएंगे। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी सरकार और बड़ी टेक कंपनियों ने ईरानी अधिकारियों को निशाना बनाने वाले ऑपरेशन्स को रोकने की बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया है। इस नई धमकी ने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह पहली बार है जब युद्ध का स्वरूप पूरी तरह से तकनीकी और कॉर्पोरेट जगत की ओर मुड़ता दिख रहा है।