तेहरान/वाशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब एक खतरनाक और नए मोड़ पर पहुंच गया है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद अब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने सीधे तौर पर बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों को अपने निशाने पर लेने का एलान किया है। IRGC ने 18 प्रमुख अमेरिकी कंपनियों की एक सूची जारी करते हुए चेतावनी दी है कि अब युद्ध का दायरा सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर कॉर्पोरेट और तकनीकी ठिकानों तक पहुंचेगा। इस कदम से वैश्विक टेक जगत में असुरक्षा और चिंता का माहौल पैदा हो गया है।
निशाने पर गूगल, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज कंपनियां
ईरान की सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जिन कंपनियों को संभावित निशाने के तौर पर चिन्हित किया है, उनमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल, इंटेल और टेस्ला जैसे बड़े नाम शामिल हैं। ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां और उनके द्वारा विकसित की गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) व सूचना तकनीक का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों की निगरानी और डिजाइन में किया जा रहा है। गौरतलब है कि ईरान ने इन कंपनियों के क्षेत्रीय ऑपरेशन्स पर जवाबी हमला करने की बात कही है।
1 अप्रैल से कार्रवाई का अल्टीमेटम और कर्मचारियों को चेतावनी
तस्नीम न्यूज एजेंसी के हवाले से जारी बयान में IRGC ने बेहद कड़े लहजे में कहा है कि ईरान पर होने वाले हर हमले के बदले इन कंपनियों की यूनिट्स को तबाही का सामना करना पड़ेगा। चेतावनी में स्पष्ट समयसीमा दी गई है कि यह सिलसिला 1 अप्रैल से शुरू होगा और तेहरान के समय के अनुसार रात 8 बजे से कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही ईरान ने इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को तुरंत दफ्तर छोड़ने की सलाह दी है ताकि वे अपनी जान बचा सकें।
बदल गया युद्ध का स्वरूप: अब पारंपरिक सीमाओं से बाहर संघर्ष
दरअसल, यह पहली बार है जब किसी देश ने तकनीकी कंपनियों को खुले तौर पर युद्ध का हिस्सा मानते हुए सीधे हमले की धमकी दी है। ईरान का तर्क है कि अमेरिकी आईटी और एआई कंपनियां उन सिस्टम्स का हिस्सा हैं जिनका इस्तेमाल उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाइयों में होता है। मैदानी सूत्रों का मानना है कि यदि यह चेतावनी हकीकत में बदलती है, तो इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी बल्कि साइबर युद्ध और जमीनी हमलों का एक ऐसा दौर शुरू हो सकता है जो पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी साबित होगा।
