ऑकलैंड। न्यूजीलैंड में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी रैकेट के सरगना बलतेज सिंह को अदालत ने 22 साल जेल की सख्त सजा सुनाई है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि 33 वर्षीय बलतेज सिंह भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह का भतीजा है। बलतेज ऑकलैंड में कारोबार की आड़ में भारत, दुबई, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों से ड्रग्स मंगवाने का एक विशाल नेटवर्क संचालित कर रहा था। स्थानीय मीडिया के अनुसार, बलतेज ने अपनी पहचान छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाई थी, लेकिन अब याचिका वापस लेने के बाद उसकी पहचान सार्वजनिक कर दी गई है।
मेथ मिली बीयर पीने से हुई युवक की मौत के बाद खुला राज
दरअसल, इस पूरे अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का पर्दाफाश मार्च 2023 में एक दर्दनाक घटना के बाद हुआ। ऑकलैंड के एक 21 वर्षीय युवक एडन सगाला ने अनजाने में ‘हनी बीयर’ समझकर लिक्विड मेथामफेटामाइन पी लिया था, जो उसे तोहफे में मिला था। ड्रग्स की भारी ओवरडोज के कारण उस युवक की मौत हो गई। जांच के दौरान पता चला कि पकड़े गए नशीले पदार्थों की अनुमानित कीमत करीब 180 करोड़ रुपये थी। इस मामले में बलतेज के सह-आरोपी हिम्मतजीत सिंह कहलोन को भी गैर-इरादतन हत्या और तस्करी का दोषी पाते हुए 21 साल की सजा सुनाई गई है।
नारियल पानी और बीयर के कैन में छिपाई गई थी करोड़ों की ड्रग्स
मैदानी सूत्रों और जांच अधिकारियों के अनुसार, बलतेज सिंह ने तस्करी के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाए थे। नशीले पदार्थों को पकड़ से बचाने के लिए भारत से मंगाए गए नारियल पानी, अमेरिका की कोम्बुचा बोतलों और कनाडा से आई हनी बीयर के लगभग 30 हजार कैन के भीतर छिपाकर रखा जाता था। साल 2021 और 2022 के बीच ये खेप न्यूजीलैंड पहुंचीं और साउथ ऑकलैंड की एक इंडस्ट्रियल यूनिट में इन्हें प्रोसेस किया गया। यहां लिक्विड मेथ को क्रिस्टल में बदलकर स्थानीय बाजारों में खपाने की तैयारी थी।
न्यायालय ने पहचान छिपाने की याचिका की खारिज
गौरतलब है कि बलतेज सिंह ने अपनी पहचान गुप्त रखने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी थी और कोर्ट ने शुरुआत में नाम उजागर न करने के निर्देश भी दिए थे। हालांकि, उसकी पहचान भारत में पहले ही सार्वजनिक हो चुकी थी। अब सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस लेने के बाद उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और अपराध के तरीकों का पूरा ब्यौरा सामने आ गया है। अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के अन्य संपर्कों और भारत सहित अन्य देशों में मौजूद मददगारों की तलाश में जुट गई हैं।
