अब धर्मांतरण पड़ेगा महंगा

-सुभाष मिश्रधर्म, डर और विधेयक—छत्तीसगढ़ में यह तीनों शब्द अब केवल अवधारणाएँ नहीं, बल्कि एक साथ चल रही वास्तविक...

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परिसीमन: गणित का खेल या लोकतंत्र की नई पटकथा?

-सुभाष मिश्रदेश में परिसीमन की प्रक्रिया जिस तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है, उसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम केवल जनसंख्या के गणित के आधार पर ...

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एनसीआर का मज़दूर आंदोलन: हक़ की पुकार, सियासत का शोर और व्यवस्था की परीक्षा

-सुभाष मिश्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के औद्योगिक शहर गुडग़ांव, मानेसर, नोएडा, फरीदाबाद, भिवाड़ी और पानीपत इन दिनों एक ऐसे आंदोलन के साक्षी बन रहे हैं, जिसे क...

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परिसीमन: बढ़ती सीटें, सिकुड़ता संतुलन और सवालों के घेरे में नीयत

-सुभाष मिश्रभारत आज दुनिया की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है यह उपलब्धि कम, चुनौती अधिक है। सीमित भूगोल, सीमित ...

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बिहार में नेतृत्व परिवर्तन: रणनीति, संकेत और राष्ट्रीय राजनीति की दिशा

-सुभाष मिश्रबिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। लंबे समय तक सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के प्रभावी दौर के बाद यदि भारतीय जनता पार्टी...

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भारतीय संविधान और बाबासाहेब अंबेडकर

-सुभाष मिश्रभारत के लोकतांत्रिक इतिहास में यदि किसी एक व्यक्ति ने विचार, संघर्ष और व्यवस्था तीनों स्तरों पर स्थायी छाप छोड़ी है, तो वह नाम है। दुर्भाग्य यह है...

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सुरों की वह लौ जो कभी नहीं बुझेगी

सुरों की वह लौ जो कभी नहीं बुझेगी

-सुभाष मिश्रआशा भोसले के निधन के साथ भारतीय संगीत जगत ने केवल एक महान गायिका को नहीं खोया, बल्कि एक पूरे युग को विदा होते देखा है। कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं जो...

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रुद्रप्रयाग में भूकंप के तेज झटके: सुबह-सुबह हिली धरती, दहशत में घरों से बाहर निकले लोग

रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में शनिवार की सुबह भूकंप के तेज झटकों ने लोगों की नींद उड़ा दी। भोर के स...

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महिला आरक्षण: नीति, राजनीति और नीयत के बीच

-सुभाष मिश्रभारत की लोकतांत्रिक यात्रा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रश्न नया नहीं है, लेकिन हर बार यह प्...

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आस्था, परंपरा और अधिकार : क्या बहस भटक रही है?

-सुभाष मिश्रभारत सचमुच विविधताओं का देश है। यहाँ धर्म केवल पूजा की विधि नहीं, बल्कि जीवन का विस्तृत सांस्कृतिक ...

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