अजब-गज़़ब चोरी : जब अपराध ने नैतिकता और मानवता की सीमाएँ लांघ दी

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की लोक-सांस्कृतिक स्मृति में हबीब तनवीर का नाटक 'चरणदास चोर आज भी जीवित है। वह चोर, जो चो...

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यूजीसी के बहाने जातिगत विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने नियमों पर रोक लगाई

-सुभाष मिश्रयूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में उठ रहा विवाद दरअसल किसी एक नीति या कैंपस व्यवस्था का सवाल नही...

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विमान हादसा, सत्ता का शून्य और महाराष्ट्र की राजनीति

-सुभाष मिश्रभारतीय राजनीति में कभी–कभी कोई एक घटना पूरे सत्ता-संतुलन को झकझोर देती है। यदि यह कल्पना भी की जाए ...

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भारत–यूरोपियन यूनियन FTA: नियमों पर आधारित विश्व व्यवस्था की निर्णायक दस्तक

-सुभाष मिश्रभारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि ...

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बड़ा फैसला:गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित, बदरी-केदार में भी हो सकता है लागू

उत्तराखंड में शुरू होने वाली आगामी चारधाम यात्रा से पहले गंगोत्री मंदिर समिति ने अहम फैसला लिया है। समिति ने गंगोत्री धाम में गैर-हिं...

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संस्कृति बनाम मनोरंजन : सभ्यता का बौद्धिक संकट

-सुभाष मिश्रभारतीय संस्कृति सदियों से अपनी समृद्धता, गहनता और विविधता के कारण विश्वभर में प्रतिष्ठित रही है। यह...

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रायपुर में पुलिस कमिश्नरी: अधिकारों का केंद्रीकरण, लेकिन क्या अपराध पर निर्णायक नियंत्रण?

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में राज्य गठन के 25 वर्षों बाद पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू हो चुकी है।...

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रायपुर साहित्य उत्सव-2026 – सत्ता और साहित्य के बीच संतुलन की तलाश

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की पहचान केवल खनिज, वन, आदिवासी संस्कृति और नदियों तक सीमित नहीं रही है। यह वह भूमि है जह...

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सत्ता मिशनरी बनाम नैतिक जिम्मेदारी: जब वर्दी ही शक का विषय बन जाए

-सुभाष मिश्रकर्नाटक के डीजीपी रामचंद्र राव का मामला जहाँ उन्हें महिलाओं को किस करने, ब्रेस्ट चूमने जैसे गंभीर आ...

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विवाह: संस्कार से ‘स्पेक्टेकल’ तक

-सुभाष मिश्रभारतीय समाज में विवाह परंपरागत रूप से संस्कार, मर्यादा और सामूहिक उत्तरदायित्व का प्रतीक रहा है। ले...

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