हिंदुस्तानी समाज की सबसे बड़ी पहचान उसकी बहुलता रही है—भाषा, पहनावा, आस्था और खान-पान, सबमें विविधता। समुद्र किनारे बसे समाजों के लिए मछली जीवन का स्वाभाविक ह...
-सुभाष मिश्रभारत में भ्रष्टाचार अब केवल नैतिक पतन या व्यक्तिगत लालच का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह एक संस्थागत संकट का रूप ले चुका है। सुप्रीम कोर्ट का भ्र...
-सुभाष मिश्रनई जनरेशन की शादी की कोई जल्दी नहीं है। यदि शादी हो भी जाए, तो बच्चा जल्दी नहीं चाहिए। देश में पहले नारा था— दो या तीन बस, फिर समय के साथ नारा बदल...
-सुभाष मिश्रभारतेंदु हरिश्चंद्र ने अंधेर नगरी के गीत में बहुत पहले जिस वाक्य को लगभग चेतावनी की तरह रखा था 'लोभ पाप का मूल है। आज वही वाक्य हमारे समय की सबसे ...
-सुभाष मिश्रउत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की ड्राफ्ट मतदाता सूची सामने आते ही लोकतंत्र के सबसे बुनियादी आधार—मतदाता—पर ही सवाल खड़े हो गए ह...
दिसंबर 2025 में संसद द्वारा वीबी-जी-राम-जी अधिनियम का पारित होना केवल एक नई ग्रामीण योजना की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह भारत की सामाजिक नीति, संघीय ढांचे और राज...