मतदाता सूची पुनरीक्षण: लोकतंत्र की सफ़ाई या विश्वास की परीक्षा

-सुभाष मिश्रदेश में लोकतंत्र की सबसे मज़बूत नींव मतदाता सूची है। जब वह कमजोर होती है तो पूरा लोकतांत्रिक ढांचा ...

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दीपावली : रोशनी के बीच अंधेरे का अहसास

-सुभाष मिश्रभारत में दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक ऊर्जा का उत्सव है। अंधकार पर प्र...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – क्या गठबंधन धर्म निभा पाएगी बिहार की राजनीति

-सुभाष मिश्रबिहार की राजनीति में चुनावी मौसम के साथ सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। सत्ता के समीकरण बन भी...

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‘द सूत्र’ के दो पत्रकार गिरफ्तार: राजस्थान पुलिस ने लगाया ब्लैकमेलिंग का आरोप, मीडिया में विरोध के स्वर

जयपुर/भोपाल। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के खिलाफ झूठी खबरें चलाकर ब्लैकमेलिंग करने के आरोप में वेब प...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – चाबी बदली, ताले वहीं

-सुभाष मिश्रहमारे शासन और प्रशासन तंत्र में तीन शब्द बहुत पहले से चले आ रहे हैं— नजऱाना, शुकराना और जबराना। पहल...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – अचानक से क्यों कर रहे हैं नक्सली बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण?

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ में इस समय जो दृश्य बन रहा है, वह नक्सल इतिहास की नई इबारत लिख रहा है। बस्तर से लेकर गढ़च...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – ब्यूरोक्रेसी के सिर पर मुख्यमंत्री का हाथ

सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक संस्कृति में बीते कुछ दिनों में जो दृश्य उभरा, उसने सत्ता और ब्यूर...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से- परलोक के साथ अब इस लोक की भी चिंता

-सुभाष मिश्रभारतीय समाज में व्याप्त धार्मिक और मिथक कथाओं में शरीर को नश्वर और आत्मा को अमर माना है। बहुत सारे ...

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पत्रकार सुरक्षा कानून की तरह शासकीय सेवक सुरक्षा कानून भी जरूरी

छत्तीसगढ़ का समाज और शासन व्यवस्था हमेशा लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा का सम्मान करने वाला रहा है। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया है, और राज्य स...

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क्या यह जातिगत मानसिकता का हमला है?

6 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान जो दृश्य उभरा, उसने न केवल न्यायालयीन गरिमा को हिलाकर रख गया बल्कि हमारे समाज के भीतर चल रहे गहरे तनाव-ल...

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