वंदे मातरम के 150 वर्ष और राजनीतिक तापमान

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से –वंदे मातरम के 150 वर्ष और राजनीतिक तापमान

-सुभाष मिश्रजब राष्ट्रीय गीत बहस का केंद्र बन जाए, तो समझना चाहिए कि राजनीति इतिहास से भी लुभावनी कथा गढ़ लेती है। लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे हो...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से- AI: अपमान का नया औज़ार

-सुभाष मिश्रएआई यानी आर्टिफि़शियल इंटेलिजेंस आज मानव क्षमता का विस्तारशील इंजन है—विश्लेषण, भाषा, शोध, सुरक्षा,...

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करीब छह हज़ार यहूदी भारत छोड़ेंगे

-डॉ. सुधीर सक्सेनानई दिल्ली। सदियों पहले भारत आ बसे यहूदियों की संख्या इजराइल के निर्माण के बाद दहाई-दर-दहाई कम से कमतर होती गयी है। इस श्रृंखला की ताज़ा कड़ी...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – छत्तीसगढ़ी: राजकीय भाषा का दर्जा, मगर ज़मीनी डगर कितनी लंबी?

-सुभाष मिश्रभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, समाज की सामूहिक स्मृतियों और स्वाभिमान की वाहक भी होती है। छत्तीसगढ...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – ‘धर्म ध्वजा’ के बहाने: रामराज्य का विधान या नई राजनीतिक-धार्मिक संरचना?

सुभाष मिश्रअयोध्या में धर्म ध्वजा का फहराया जाना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, यह उस यात्रा का अगला अध्य...

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एग्री पायलट.एआई से आएगी कृषि क्रांति, महाराष्ट्र के बाद अब छत्तीसगढ़ में नवाचार…

कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों ने किसानों की उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश...

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नई श्रम संहिता: श्रमिक संरक्षण और औद्योगिक लचीलापन के बीच उलझी बहस

-सुभाष मिश्रसरकार ने पांच साल पहले संसद से पारित चार नई श्रम संहिताओं—मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, साम...

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