चुनाव का खेला और विचारधारा की गिरती कीमत

-सुभाष मिश्रभारतीय लोकतंत्र में चुनाव को लोकतांत्रिक उत्सव कहा जाता है। लेकिन समय के साथ यह उत्सव कई बार एक ऐसे...

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पांच राज्यों के चुनाव: किसकी शह, किसकी मात?

-सुभाष मिश्रदेश में एक बार फिर लोकतांत्रिक उत्सव की शुरुआत हो गई है। इलेक्शन कमीशन आफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल, अ...

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खाड़ी युद्ध और गैस का संकट: वैश्विक आग की तपिश घर तक

-सुभाष मिश्रकवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविता है -यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में आग लगी होक्या तुमदूसरे कमरे ...

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रायसीना डायलॉग: भारत का उभरता वैश्विक मंच

सुभाष मिश्रपिछले दिनों नई दिल्ली में संपन्न ग्यारहवें रायसीना डायलॉग 2026 मे...

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नई किस्म का फसल चक्र परिवर्तन

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से लगातार छत्तीसगढ़ जिसे धान का कटोरा कहा जाता है ,वहां पर फसल चक्र परि...

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आधी आबादी की मेहनत: क्या सचमुच सशक्तिकरण की ओर बढ़ रहे हैं कदम?

-सुभाष मिश्रअभी हाल ही में हमने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर काफी बात...

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सडक़ें चौड़ी, सोच संकरी

सडक़ें चौड़ी, सोच संकरी

-सुभाष मिश्रशहरों में बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने के लिए सरकारें लगातार नई सडक़ें बना रही हैं, पुराने मार्गों का चौड़ीकरण कर रही हैं और फ्लाईओवर तथा ओवरब्...

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नशे की खेती और समाज की बेख़बरी

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के समोदा गांव में मक्के की फसल के बीच बड़े पैमाने पर अफीम की अवैध खेती का म...

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मिडिल ईस्ट का संकट : युद्ध, सत्ता और वैश्विक संतुलन की परीक्षा

-सुभाष मिश्रमिडिल ईस्ट में तेजी से बदलती घटनाएँ केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष की कहानी नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक शक...

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त्योहारों के बदलते स्वरूप

-सुभाष मिश्रअभी होली का त्योहार बीता है और कई जगहों पर रंग पंचमी भी मनाई जा रही है, लेकिन जो लोग लंबे समय से इस...

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