विनोद कुमार शुक्ल की 89वीं जयंती पर स्मरण कार्यक्रम 1 जनवरी को

विनोद कुमार शुक्ल की 89वीं जयंती पर स्मरण कार्यक्रम “ सब कुछ होना बचा रहेगा “

रायपुर। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि विनोद कुमार शुक्ल के 89वें जन्मदिन के अवसर पर 1 जनवरी को रायपुर के वृंदावन हॉल में शाम 4:00 बजे से “स्मरण विनोद जी” ...

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 नए साल की दस्तक और हड़ताल की आहट

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – नए साल की दस्तक और हड़ताल की आहट

-सुभाष मिश्रनया साल आम तौर पर उम्मीदों, संकल्पों और नई शुरुआत का प्रतीक होता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में 2026 का आग़ाज़ कर्मचारियों के लिए हड़ताल और टकराव के माहौ...

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याद किए गए महान शायर मिर्जा़ गालिब

रायपुर। नए साहित्यिक सांस्कृतिक समूह 'लोकमित्र' ने विगत 27 दिसंबर 2025 को हर्ष और उत्साह के साथ, एक वैविध्यपूर्ण कार्यक्रम के जरिए, महान शायर मिर्ज़ा ग़ालिब क...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – कहने को तो हैं दुनिया में सुखऩवर बहुत अच्छे

-सुभाष मिश्रमिर्जा असद-उल्लाह बेग ख़ाँ, जिन्हें दुनिया मिर्जा ग़ालिब के नाम से जानती है, को याद करना किसी एक शा...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से- शास्त्र की परंपरा, प्रवचन का उभार और राजनीति का प्रवेश

-सुभाष मिश्रभारतीय समाज की बुनियाद जिस बौद्धिक उदारता पर टिकी रही है, उसका सबसे जीवंत रूप शास्त्रार्थ की परंपरा...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – सात फेरों की नहीं, अनुबंध की शादी

-सुभाष मिश्रविवाह भारतीय समाज में कभी केवल दो व्यक्तियों के बीच का निजी संबंध नहीं रहा। यह एक संस्कार था—जहां परिवार, समाज और धर्म साझी भूमिका निभाते थे। अग्न...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से- धर्म के ठेकेदार , बेरोजग़ारी और भय का कारोबार

-सुभाष मिश्रदुश्मनी जमकर करो, लेकिन ये गुंजाइश रहे…बशीर बद्ररायपुर के मैग्नेटो मॉल में जो हुआ, वह किसी एक मॉल, ...

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अटल के आईने में आज की भाजपा, अटल से मोदी तक

सुभाष मिश्रभारतीय राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने समय से आग...

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सरकार धर्मातरण विषय पर विधेयक लाये : दुग्गा

संजय सोनीभानुप्रतापपुर। आमाबेड़ा बड़े तेवड़ा में धर्मातरण को लेकर विवाद एवं प्रदेश में धर्मातरण को लेकर जनजाति ...

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वेतनमान की दुहाई, बाज़ार की बन आई

Demand for pay scale : बाज़ार की बन आई

‘हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिनदिल को खुश रखने के लिए ग़ालिब खय़ाल अच्छा है।’यह पंक्ति ...

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