मध्य प्रदेश के 4 लाख से अधिक सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी खबर आई है। अब केंद्र सरकार के घोषणा करते ही राज्य सरकार भी इसे तुरंत लागू कर देगी। इससे बुजुर्गों का वित्तीय लाभ बढ़ेगा।
इसके लिए अब पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ की सहमति का इंतजार बिल्कुल नहीं करना पड़ेगा। यही वजह है कि दोनों राज्यों के वित्त विभागों ने इस संबंध में एक अहम संयुक्त आदेश जारी कर दिया है। यह नई व्यवस्था पूरे प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी। सभी विभाग इसकी तैयारी में जुटे हैं।
छत्तीसगढ़ से मंजूरी का 26 साल पुराना नियम समाप्त
पहले वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था। उस समय राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लाभ देने के लिए दोनों राज्यों की आपसी सहमति अनिवार्य थी। हालांकि इस कागजी औपचारिकता के कारण प्रशासनिक दस्तावेज अक्सर महीनों तक सरकारी दफ्तरों में अटके रहते थे। नतीजतन बुजुर्गों को अपने हक के लिए 6-6 महीने तक लंबा इंतजार करना पड़ता था। अब इस पुराने पेंच को दोनों राज्यों के वित्त सचिवों ने आपसी बैठक कर पूरी तरह हटा दिया है। इसलिए अब दोनों राज्य स्वतंत्र रूप से अपना कार्यकारी आदेश जारी कर सकेंगे।
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इस निर्णय पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हित में एक बेहद संवेदनशील और सकारात्मक निर्णय लिया है। इसके बाद अब बुजुर्गों को समय पर बढ़ा हुआ पैसा मिल सकेगा। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद प्रशासनिक लेटलतीफी पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी।
हालांकि कोई भी राज्य केंद्र द्वारा घोषित दर से अधिक पेंशनभोगी महंगाई राहत का भुगतान नहीं करेगा। इसके अलावा दोनों राज्य भविष्य में आपस में केवल वित्तीय भार की जरूरी जानकारी साझा करेंगे। आने वाले समय में जैसे ही नई दरें घोषित होंगी, बढ़ी हुई राशि सीधे खातों में भेज दी जाएगी। इससे प्रदेश के लाखों परिवारों को बड़ी आर्थिक मजबूती मिलेगी।