रायपुर साहित्य उत्सव में ‘नई पीढ़ी की फिल्मी दुनिया’ पर परिचर्चा, सिनेमा-साहित्य के रिश्तों पर हुआ विमर्श

रायपुर,। रायपुर साहित्य उत्सव के अंतर्गत श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में शनिवार को “नई पीढ़ी की फिल्मी दुनिया” विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में अभिनेता श्री सत्यजीत दुबे, अभिनेत्री सुश्री टी. जे. भानु, विधायक एवं प्रसिद्ध कलाकार श्री अनुज शर्मा तथा सुश्री सुविज्ञा दुबे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

परिचर्चा के दौरान विधायक एवं कलाकार श्री अनुज शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा सरल, सहज और संवादात्मक है, जिसे सिनेमा के माध्यम से और अधिक व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर महिलाओं की सशक्त भूमिका का है, जहां सिनेमा और समाज दोनों क्षेत्रों में उनका योगदान लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने फिल्म निर्माण प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सिनेमा में निर्देशक की भूमिका प्रमुख होती है, रंगमंच में अभिनेता की प्रधानता होती है, जबकि धारावाहिकों में लेखक की भूमिका निर्णायक होती है। साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसी रचनाकार की पहचान उसके व्यक्तित्व से नहीं, बल्कि उसकी रचनाओं से होती है।

अभिनेता श्री सत्यजीत दुबे ने कहा कि किसी भी फिल्म की स्थायित्व उसकी भावनात्मक गहराई पर निर्भर करता है। भावनात्मक तत्वों से जुड़ी फिल्में ही लंबे समय तक दर्शकों के मन में जीवित रहती हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का साहित्य अत्यंत समृद्ध है और यहां सिनेमा के लिए उपयुक्त कहानियों की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल पाठक वर्ग को प्रोत्साहित करने की है।

अभिनेत्री सुश्री टी. जे. भानु ने डिजिटल माध्यमों, विशेषकर यूट्यूब, को नए कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि आज छोटी कहानियां विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा का आनंद केवल गंतव्य में नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया में निहित होता है। उन्होंने सिनेमा में दृश्यात्मक प्रस्तुति को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जब महिलाएं निर्माता की भूमिका में होती हैं, तो वे कार्यस्थल पर मानवीय संवेदनाओं को बेहतर ढंग से समझती हैं।

सुश्री सुविज्ञा दुबे ने कहा कि बच्चों में आत्मविश्वास का विकास परिवार से ही शुरू होता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को अपनी बात रखने और अभिव्यक्ति के अवसर देने का आग्रह किया, जिससे उनमें रचनात्मकता और आत्मबल का विकास हो सके।

परिचर्चा में वक्ताओं ने एकमत से कहा कि सशक्त कहानी, भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक जिम्मेदारी नई पीढ़ी के सिनेमा की दिशा निर्धारित करेंगे।

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