:दिलीप गुप्ता:
सरायपाली : एक पुरानी कहावत है” एक अनार सौ बीमार ” कुछ इसी तरह की कहावत सरायपाली की राजनीति में भी प्रवेश के चुकी है । एक ही सड़क स्वीकृति के लिए कांग्रेस के विधायक व भाजपा के सांसद के तरफ से समाचार प्रकाशन के बाद यह स्थिति निर्मित हो गई है आखिर स्वीकृति किसने दिलाई ?यह दिनभर सोशल मीडिया में ट्रोल हो रहा है और इस पर चर्चाएं भी जोरो पर है ।
जब भी कांग्रेस विधायक द्वारा किसी निर्माण व विकास कार्य स्वीकृत कराए जाने का समाचार प्रकाशित होता है भाजपा के पदाधिकारीयो की तत्काल विरोध में प्रतिक्रिया आ जाती है कि यह हमारे द्वारा व हमारी सरकार द्वारा स्वीकृत कराया गया है पर इसके प्रत्युत्तर में कांग्रेस का कोई भी जवाब नहीं आता तो वहीं भाजपा की तरफ से भी ऐसे स्वीकृति तब आती है जब कांग्रेस का समाचार छप चुका होता है । कुछ इसी तरह का प्रकरण फिर आज सामने आया है ।
छुईपाली से पालीडीह मार्ग हेतु लगभग 34 करोड़ रुपए की स्वीकृति का समाचार कल “”आज की जनधारा”में छपते ही आज रायपुर से प्रकाशित एक अखबार में इसी तरह का एक समाचार कांग्रेस विधायक चातुरी नन्द व महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी के नाम से प्रकाशित किया गया । दोनों के समाचारों में एक ही राशि व एक ही सड़क के कार्यों का उल्लेख है । वहीं समाचार का प्रकाशन भी एक ही सेंटर से कराया गया है । आमजनता में यह भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है कि आखिर यह 34 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों की स्वीकृति किसके मांग व अनुशंसा पर की गई ? दोनों राजनैतिक दलों के नेता अपने अपने दावे पर अडिग हैं ।

ज्ञातव्य हो कि पिछले कुछ समय से जब से पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से शिक्षक रही चातुरी नंद व भाजपा से सरला कोसारिया के मध्य जबरदस्त माहौल बना था कौन जीतेगा यह कहना मुश्किल था । एक तरफ कांग्रेस के लिए सीट को बचाने की फिक्र थी तो वहीं दूसरी ओर भाजपा की पुनः जितने का जुनून था । शुरुवाती दौर में ऐसा लग रहा था कि शायद यह सीट भाजपा जीत जाएगी पर जब परिणाम आया तो भाजपा के हांथ पिछले बार की अपेक्षा और भारी मतों से हार का परिणाम आया । यह आंकड़ा लगभग 55 हजार तक पहुंच गया । यही हार आज भी भाजपा को व खासकर प्रत्याशी के गले नहीं उतर रही है । हालांकि भाजपा के हार के पीछे बहुत कारण है पर भाजपा के ऊपर के नेताओं को स्थानीय नेता वास्तविक कारण अपने बचाव के लिए नहीं बताते ।जिसकी वजह से भाजपा में सुधार नहीं हो पा रहा है और यही कारण बार बार भाजपा के पराजय का कारण बनता है ।
इस अप्रत्याशित परिणाम की वजह से भाजपा व कांग्रेस प्रत्याशी कोई भी मौका मिलता है तो सोशल मीडिया व अखबारों के माध्यम से अपनी खुन्नस निकाल लिया करते हैं ।
इस तरह का कोई भी समाचार के प्रकाशन या पोर्टल में समाचार आने के बाद भाजपा नेत्री का स्टेटमेन सर्वप्रथम आता है व इस निर्माण तथा विकास कार्यों को भाजपा सरकार को श्रेय देती है । जबकि इन प्रतिक्रियाओं का जवाब विधायक द्वारा कभी नहीं दिया जाता । उनका कहना है कि वह कार्यों पर विश्वास करती हैं न कि झूठे प्रचार में । इसी तरह भाजपा नेत्री आरोप लगाती है कि विधायक विभिन्न विभागों से जानकारी एकत्र कर मेरे द्वारा स्वीकृति कराए जाने का झूठा प्रयास करती हैं । वहीं इस संबंध में एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार आपकी , सिस्टम आपका , अधिकारी व विभाग आपका तो आप लोग ( भाजपाई ) विभागों से जानकारी लेकर समाचार का प्रकाशन क्यों नहीं करते । आपकी सरकार में एक कांग्रेस विधायक को यह सफलता मिल रही है तो आपको तो घर बैठे यह जानकारी सहज ही मिल सकती है । विधायक सक्रिय व मेहनती है इसलिए उन्हें सफलता मिलती है पर आपको यह सब कुछ करना नहीं है ।

कुछ भी हो क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए सभी को आपसी सहयोग बनाकर राजनीति व व्यक्तिगत विचारधारा से ऊपर उठकर आमजनता के हित में कार्य करना चाहिए । इस तरह श्रेय लेने या झूठा श्रेय लेना कतई उचित नहीं कहा जा सकता । कौन सही है व कौन गलत यह जनता है समय पर सब समझ जाएगी पर जनता के विश्वास की कसौटी पर खरा उतरना ही सबसे बड़ी कसौटी है ।इस तरह आरोप प्रत्यारोप की जगह जनता को सुविधाएं कैसे उपलब्ध कराया जाए शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुंचे , लोग कैसे लाभान्वित हों पर प्रयास करना चाहिए ।इस तरह के आरोप प्रत्यारोप से जनप्रतिनिधियों के स्वयं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है । तो वहीं इस तरह के समाचारों के प्रकाशन के लिए संवाददाताओं को भी सावधानी प्रकाशन के पूर्व बरतनी चाहिए । इस तरह के एक समाचार को दो जनप्रतिनिधियों के तरफ से आने पर पहले सच्चाई व स्वीकृति पत्र मांग लेना चाहिए । ताकि बाद में ऐसी स्थिति से बचा जा सके । ऐसे में संवाददाताओं पर भी निष्पक्षता की उंगली उठती है ।