नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली में 45 करोड़ रुपये की जमीन को फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जाने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। साकेत कोर्ट ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी को तीन दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था।
पुलिस के मुताबिक, जवाद अहमद सिद्दीकी पहले से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यायिक हिरासत में था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उसने अन्य लोगों के साथ मिलकर फर्जी कागजात तैयार कर दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के मदनपुर खादर गांव स्थित करीब 1.146 एकड़ जमीन अपने नाम कराई। इस जमीन की वर्तमान बाजार कीमत लगभग 45 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि दस्तावेजों में जमीन की कीमत केवल 75 लाख रुपये दिखाई गई, जबकि वास्तविक लेन-देन कहीं ज्यादा होने की आशंका है। एजेंसियां अब पूरे आर्थिक नेटवर्क और लेन-देन की जांच में जुटी हैं।
इससे पहले भी जवाद अहमद सिद्दीकी की जमानत याचिका साकेत कोर्ट दो बार खारिज कर चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय ने उसे 24 मार्च को तिहाड़ जेल से गिरफ्तार किया था। यह उसके खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग का दूसरा मामला है।
ईडी के अनुसार, अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी है। एजेंसी पहले ही 17 जनवरी को इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
सूत्रों के मुताबिक, अल-फलाह ग्रुप की जांच दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके से जुड़े मामले में भी चल रही है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और संपत्तियों की पहचान करने में जुटी हैं।
कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में जांच में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।