पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ अपने विवादित बयानों को लेकर एक बार फिर अपनी ही सरकार और विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। इस बार उन्होंने पाक अधिकृत कश्मीर यानी पीओके के रहने वाले लोगों को लेकर अनाप-शनाप बयानबाजी की है। ख्वाजा आसिफ के इस बयान के बाद पाकिस्तान की संसद में भारी हंगामा खड़ा हो गया है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी और जेयूआई-एफ के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने रक्षा मंत्री को जमकर फटकार लगाई है और उन्हें धैर्य रखने की सलाह दी है।

टीवी इंटरव्यू में दिया था विवादित बयान, कहा- वे असली कश्मीरी नहीं हैं
पूरा मामला एक टीवी इंटरव्यू से शुरू हुआ। इस इंटरव्यू में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पीओके के रावलकोट इलाके के लोगों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनों से प्रभावित रावलकोट के लोग असल में कश्मीरी नहीं हैं और वे उन्हें कश्मीरी नहीं मानते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि रावलकोट और मीरपुर के लोग पोटोहारी भाषा बोलते हैं, इसलिए उन्हें असली कश्मीरी की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इस बयान के बाद चौतरफा घिरे रक्षा मंत्री को बाद में अपनी सफाई भी देनी पड़ी।
पीओके में महंगाई और बिजली संकट को लेकर सुलग रही है आग
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब पूरे पाक अधिकृत कश्मीर में महंगाई और बिजली की बढ़ती कीमतों को लेकर जनता सड़कों पर है। वहां जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन चल रहे हैं। जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी का आसान मतलब वहां के स्थानीय लोगों, समाजसेवियों और व्यापारियों का एक बड़ा संयुक्त संगठन है, जो अपने बुनियादी अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहा है। इन प्रदर्शनों में भारी हिंसा हुई है और कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। वहां के लोग आर्थिक तंगी, राजनीतिक अधिकारों और बेहतर सरकारी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
बिलावल भुट्टो ने संसद में घेरा, कहा- जलती आग पर तेल छिड़क रहे हैं मंत्री
ख्वाजा आसिफ के इस बयान पर बिलावल भुट्टो जरदारी ने संसद में बहुत तीखा हमला बोला। बिलावल ने सवाल उठाया कि एक रक्षा मंत्री द्वारा कश्मीरी भाई-बहनों को कश्मीरी न मानने वाले बयान को आखिर कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मंत्री ने अभी तक इस पर माफी भी नहीं मांगी है और वे अब भी कैबिनेट यानी सरकार के मुख्य मंत्री समूह में बने हुए हैं। बिलावल ने इसे पहले से लगी आग में तेल छिड़कने जैसा बताया। वहीं मौलाना फजलुर रहमान ने भी कहा कि सरकार की प्रतिक्रिया में बचपना नहीं दिखना चाहिए। उन्हें ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर भावुक होने के बजाय समझदारी और धैर्य से काम लेना चाहिए।