नई श्रम संहिता: श्रमिक संरक्षण और औद्योगिक लचीलापन के बीच उलझी बहस

-सुभाष मिश्रसरकार ने पांच साल पहले संसद से पारित चार नई श्रम संहिताओं—मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, साम...

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क्या नष्ट हो जायेगा ग्रेट निकोबार?

क्या नष्ट हो जायेगा ग्रेट निकोबार?

- डॉ. सुधीर सक्सेनाग्रेट निकोबार में अलार्म लगातार घनघना रहा है। खतरे की घंटी लगातार बज रही है। मगर उसकी आवाज को लगातार अनसुना किया जा रहा है। घड़ी की सुइयां त...

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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से- लाल किले के साये में विस्फोट, जब दिल्ली की सुरक्षा को चुनौती मिली

-सुभाष मिश्रदिल्ली को देश का दिल कहा जाता है और लाल किला उस दिल की धड़कन है। यह वह ऐतिहासिक प्रतीक, जहां से प्र...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से वंदे मातरम के जरिए राष्ट्रीय एकता और अखंडता की कोशिश

-सुभाष मिश्रदेश की स्वतंत्रता के आंदोलन में जब संघर्ष चरम पर था, तब जो स्वर सबसे बुलंद होकर उभरा था, वह था वंदे...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से- कर्मचारी की दिवाली, सरकार की गारंटी और जनता की अपेक्षा

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ में इस बार दीपावली सिर्फ रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि कर्मचारियों की रणनीति तय करने का भी अव...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – हर वह धरती, जहां से जीवन और संवेदना फूटती है

-सुभाष मिश्रजैसे-जैसे महिलाएं आर्थिक रूप से सक्षम, शिक्षित और आत्मनिर्भर होती जा रही हैं, वैसे-वैसे उनका सामाजि...

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प्रतिरोध की आवाज़ और असहमति का मूल्य

-सुभाष मिश्रप्रतिरोध की आवाज़ को दबाने की कोशिश कोई नई बात नहीं है। सत्ता चाहे किसी की भी रही हो, उसे अपने खिला...

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Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से -छत्तीसगढ़ महतारी सबकी है – अस्मिता को नफरत का औज़ार न बनाएं

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ इन दिनों अस्मिता की एक नई बहस में उलझा हुआ है। छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति को क्षतिग्रस्त ...

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हरियाणा के बहाने बिहार पर निशाना : चुनावी पारदर्शिता और लोकतंत्र के भरोसे की जांच

-सुभाष मिश्रहरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणाम ने देश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है। क्या भारत में चुन...

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