विमान हादसा, सत्ता का शून्य और महाराष्ट्र की राजनीति

-सुभाष मिश्रभारतीय राजनीति में कभी–कभी कोई एक घटना पूरे सत्ता-संतुलन को झकझोर देती है। यदि यह कल्पना भी की जाए ...

Continue reading

‘नशा चढ़ाबो जान’ से चर्चा में झामुमो विधायक दशरथ गगराई, वीडियो को लेकर सियासी विवाद…

झारखंड के सरायकेला-खरसावां से झामुमो विधायक दशरथ गगराई इन दिनों राजनीति से ज्यादा अपने गाने को लेकर सुर्खियों में हैं। आदिवासी भाषा म...

Continue reading

संस्कृति बनाम मनोरंजन : सभ्यता का बौद्धिक संकट

-सुभाष मिश्रभारतीय संस्कृति सदियों से अपनी समृद्धता, गहनता और विविधता के कारण विश्वभर में प्रतिष्ठित रही है। यह...

Continue reading

सत्ता मिशनरी बनाम नैतिक जिम्मेदारी: जब वर्दी ही शक का विषय बन जाए

-सुभाष मिश्रकर्नाटक के डीजीपी रामचंद्र राव का मामला जहाँ उन्हें महिलाओं को किस करने, ब्रेस्ट चूमने जैसे गंभीर आ...

Continue reading

विवाह: संस्कार से ‘स्पेक्टेकल’ तक

-सुभाष मिश्रभारतीय समाज में विवाह परंपरागत रूप से संस्कार, मर्यादा और सामूहिक उत्तरदायित्व का प्रतीक रहा है। ले...

Continue reading

खान-पान, आस्था और क़ानून के बीच संतुलन की ज़रूरत

खान-पान, आस्था और क़ानून के बीच संतुलन की ज़रूरत

हिंदुस्तानी समाज की सबसे बड़ी पहचान उसकी बहुलता रही है—भाषा, पहनावा, आस्था और खान-पान, सबमें विविधता। समुद्र किनारे बसे समाजों के लिए मछली जीवन का स्वाभाविक ह...

Continue reading

धर्मांतरण: आस्था, प्रलोभन या संगठित तंत्र?

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का प्रश्न कोई नया विषय नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में सामने आए तथ्यों ने इ...

Continue reading

क्या भ्रष्टाचार पर अंकुश संभव है?

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से: क्या भ्रष्टाचार पर अंकुश संभव है?

-सुभाष मिश्रभारत में भ्रष्टाचार अब केवल नैतिक पतन या व्यक्तिगत लालच का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह एक संस्थागत संकट का रूप ले चुका है। सुप्रीम कोर्ट का भ्र...

Continue reading

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से: अश्लीलता का कारोबार- किसी की मजबूरी, किसी का मनोरंजन

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से: अश्लीलता का कारोबार- किसी की मजबूरी, किसी का मनोरंजन

समाज में धीरे-धीरे अश्लीलता की स्वीकारिता बढ़ती जा रही है। एक ओर जब हिजाब की बात हो रही हो, लड़कियों के पहनावे, जीवनशैली पर सवाल उठ रहे हैं, वही दूसरी तरह स्ट...

Continue reading

नई जनरेशन की नई चाहत-ना शादी, ना बच्चा

Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से: नई जनरेशन की नई चाहत-ना शादी, ना बच्चा

-सुभाष मिश्रनई जनरेशन की शादी की कोई जल्दी नहीं है। यदि शादी हो भी जाए, तो बच्चा जल्दी नहीं चाहिए। देश में पहले नारा था— दो या तीन बस, फिर समय के साथ नारा बदल...

Continue reading