नशे की खेती और समाज की बेख़बरी

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के समोदा गांव में मक्के की फसल के बीच बड़े पैमाने पर अफीम की अवैध खेती का म...

Continue reading

मिडिल ईस्ट का संकट : युद्ध, सत्ता और वैश्विक संतुलन की परीक्षा

-सुभाष मिश्रमिडिल ईस्ट में तेजी से बदलती घटनाएँ केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष की कहानी नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक शक...

Continue reading

त्योहारों के बदलते स्वरूप

-सुभाष मिश्रअभी होली का त्योहार बीता है और कई जगहों पर रंग पंचमी भी मनाई जा रही है, लेकिन जो लोग लंबे समय से इस...

Continue reading

मुहूर्त, बाज़ार और विस्तारित होते त्यौहार

-सुभाष मिश्रमुहूर्त, बाज़ार और विस्तारित होते त्यौहार पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता इसलिए भी है क्योंकि ...

Continue reading

जंग की आग और जनभावना का ज्वार

-सुभाष मिश्रमिडिल ईस्ट की जंग अब केवल मिसाइलों और ड्रोन की लड़ाई नहीं रह गई है, यह जनभावनाओं की भी जंग बन चुकी है। अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद जिस तर...

Continue reading

ईरान-इजरायल युद्ध और विश्व व्यवस्था की परीक्षा

-सुभाष मिश्रमिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा है और इस बार स्थिति सामान्य सीमा से कहीं आगे निकलती दिखा...

Continue reading

आरोप, एजेंसियां और लोकतंत्र का नैरेटिव

-सुभाष मिश्रदिल्ली की शराब नीति से जुड़े मामलों में लंबी जांच, गिरफ्तारियां और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बाद जब अदालतें कई आरोपियों को राहत देती हैं या सबूत...

Continue reading

यह जो पब्लिक है सब जानती है

-सुभाष मिश्रकक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े अध्याय को हटाने का निर...

Continue reading

नाम बदलने और छोटे का चलन

-सुभाष मिश्रकेरल का नाम बदलकर केरलम हो गया। इलाहाबाद अब प्रयागराज है। बम्बई अब मुम्बई है। जेनजी के लिए रायपुर क...

Continue reading

‘संकल्प’ या संदेह? छत्तीसगढ़ के बजट पर एक संतुलित पड़ताल

-सुभाष मिश्रवित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.72 लाख करोड़ का 'संकल्पÓ बजट विधानसभा में पेश होते ही छत्तीसगढ़ की राजन...

Continue reading