त्योहारों के बदलते स्वरूप

-सुभाष मिश्रअभी होली का त्योहार बीता है और कई जगहों पर रंग पंचमी भी मनाई जा रही है, लेकिन जो लोग लंबे समय से इस...

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ईरान-इजरायल युद्ध और विश्व व्यवस्था की परीक्षा

-सुभाष मिश्रमिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा है और इस बार स्थिति सामान्य सीमा से कहीं आगे निकलती दिखा...

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यह जो पब्लिक है सब जानती है

-सुभाष मिश्रकक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े अध्याय को हटाने का निर...

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‘संकल्प’ या संदेह? छत्तीसगढ़ के बजट पर एक संतुलित पड़ताल

-सुभाष मिश्रवित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.72 लाख करोड़ का 'संकल्पÓ बजट विधानसभा में पेश होते ही छत्तीसगढ़ की राजन...

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विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा: संकेत, संकल्प और बजट की कसौटी

विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा: संकेत, संकल्प और बजट की कसौटी

सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ विधानसभा के अष्टम सत्र में राज्यपाल रमेन डेका के अभिभाषण, आर्थिक सर्वेक्षण और आगामी बजट की तैयारियों ने राज्य की विकास यात्रा की एक स्पष्...

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कानून, अदालत और बदलता समाज

-सुभाष मिश्रन्यायालय जब निर्णय सुनाता है तो वह केवल किसी एक व्यक्ति के भाग्य का निर्धारण नहीं करता, बल्कि कानून...

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कांग्रेसियों की बयान बाजी

कांग्रेसियों की बयान बाजी

-सुभाष मिश्रकांग्रेस नेताओं के बोल-बच्चन इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं और ऐसा लगने लगा है कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के भीतर बयान देने की एक समाना...

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ऑस्ट्रेलिया में दान और मदद संस्कृति

ऑस्ट्रेलिया से सुभाष मिश्रभारत जैसे समाज में दान केवल सामाजिक व्यवहार नहीं, बल्कि सांस्कृ...

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धान का कटोरा और खनिज की धरती, संतुलन ही सुशासन की असली कसौटी

-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की राजनीति में धान केवल एक फसल नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, समाज और सत्ता तीनों का केंद्र है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ...

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सत्ता के साये में अपमान की संस्कृति

-सुभाष मिश्रकिसी एक अधिकारी के निलंबन या किसी एक घटना को लेकर उठी हलचल अक्सर कुछ दिनों में थम जाती है, लेकिन उस...

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