मिडिल ईस्ट का संकट : युद्ध, सत्ता और वैश्विक संतुलन की परीक्षा

-सुभाष मिश्रमिडिल ईस्ट में तेजी से बदलती घटनाएँ केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष की कहानी नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक शक...

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त्योहारों के बदलते स्वरूप

-सुभाष मिश्रअभी होली का त्योहार बीता है और कई जगहों पर रंग पंचमी भी मनाई जा रही है, लेकिन जो लोग लंबे समय से इस...

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मुहूर्त, बाज़ार और विस्तारित होते त्यौहार

-सुभाष मिश्रमुहूर्त, बाज़ार और विस्तारित होते त्यौहार पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता इसलिए भी है क्योंकि ...

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ईरान-इजरायल युद्ध और विश्व व्यवस्था की परीक्षा

-सुभाष मिश्रमिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा है और इस बार स्थिति सामान्य सीमा से कहीं आगे निकलती दिखा...

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आरोप, एजेंसियां और लोकतंत्र का नैरेटिव

-सुभाष मिश्रदिल्ली की शराब नीति से जुड़े मामलों में लंबी जांच, गिरफ्तारियां और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बाद जब अदालतें कई आरोपियों को राहत देती हैं या सबूत...

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यह जो पब्लिक है सब जानती है

-सुभाष मिश्रकक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े अध्याय को हटाने का निर...

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नाम बदलने और छोटे का चलन

-सुभाष मिश्रकेरल का नाम बदलकर केरलम हो गया। इलाहाबाद अब प्रयागराज है। बम्बई अब मुम्बई है। जेनजी के लिए रायपुर क...

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‘संकल्प’ या संदेह? छत्तीसगढ़ के बजट पर एक संतुलित पड़ताल

-सुभाष मिश्रवित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.72 लाख करोड़ का 'संकल्पÓ बजट विधानसभा में पेश होते ही छत्तीसगढ़ की राजन...

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टैरिफ का ट्रंप कार्ड और वैश्विक अनिश्चितता

-सुभाष मिश्रअमेरिकी राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप का सबसे प्रभावी हथियार यदि कोई रहा है तो वह टैरिफ नीति है एक ऐसा आर्थिक औजार जिसे उन्होंने कूटनीतिक दबाव, घरेलू ...

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संवेदनशील न्याय की जरूरत: यौन अपराधों पर न्यायपालिका की नई पहल

-सुभाष मिश्रयौन हिंसा और विशेषकर बच्चों व महिलाओं के खिलाफ अपराध आज केवल भारत की समस्या नहीं रह गए हैं, बल्कि य...

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