23
Jan
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Jan
रायपुर साहित्य उत्सव-2026 – सत्ता और साहित्य के बीच संतुलन की तलाश
-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ की पहचान केवल खनिज, वन, आदिवासी संस्कृति और नदियों तक सीमित नहीं रही है। यह वह भूमि है जह...
22
Jan
सत्ता मिशनरी बनाम नैतिक जिम्मेदारी: जब वर्दी ही शक का विषय बन जाए
-सुभाष मिश्रकर्नाटक के डीजीपी रामचंद्र राव का मामला जहाँ उन्हें महिलाओं को किस करने, ब्रेस्ट चूमने जैसे गंभीर आ...
21
Jan
विवाह: संस्कार से ‘स्पेक्टेकल’ तक
-सुभाष मिश्रभारतीय समाज में विवाह परंपरागत रूप से संस्कार, मर्यादा और सामूहिक उत्तरदायित्व का प्रतीक रहा है। ले...
19
Jan
खान-पान, आस्था और क़ानून के बीच संतुलन की ज़रूरत
हिंदुस्तानी समाज की सबसे बड़ी पहचान उसकी बहुलता रही है—भाषा, पहनावा, आस्था और खान-पान, सबमें विविधता। समुद्र किनारे बसे समाजों के लिए मछली जीवन का स्वाभाविक ह...
19
Jan
धर्मांतरण: आस्था, प्रलोभन या संगठित तंत्र?
-सुभाष मिश्रछत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का प्रश्न कोई नया विषय नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में सामने आए तथ्यों ने इ...
18
Jan
महाराष्ट्र से बिहार तक : क्या बदलती भारतीय राजनीति का संकेत हैं ये चुनावी नतीजे
-सुभाष मिश्रमहाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों से लेकर बिहार विधानसभा चुनाव तक, एनडीए और भाजपा को मिली लगातार सफलत...
16
Jan
Editor-in-Chief सुभाष मिश्र की कलम से – मुझे वर्चुअल लड्डू नहीं चाहिए
-सुभाष मिश्रमकर संक्रांति के इन दिनों में मेरे व्हाट्सएप पर बधाइयों की बाढ़ है। हर संदेश के साथ लड्डू, तिलकुट, ...