विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा: संकेत, संकल्प और बजट की कसौटी

विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा: संकेत, संकल्प और बजट की कसौटी

सुभाष मिश्र
छत्तीसगढ़ विधानसभा के अष्टम सत्र में राज्यपाल रमेन डेका के अभिभाषण, आर्थिक सर्वेक्षण और आगामी बजट की तैयारियों ने राज्य की विकास यात्रा की एक स्पष्ट रूपरेखा सामने रखी है। राज्य स्थापना की रजत जयंती, नए विधानसभा भवन और 2047 तक विकसित राज्य बनने के संकल्प के बीच यह बजट सत्र केवल वित्तीय दस्तावेज नहीं बल्कि नीति निरंतरता और भविष्य की दिशा का संकेत बनकर उभर रहा है।

अभिभाषण में विकास की जो तस्वीर प्रस्तुत की गई, उसका केंद्र समावेशी वृद्धि है। अंत्योदय, महिला सशक्तिकरण, किसान कल्याण और जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार ये वे आधार हैं जिन पर राज्य की विकास रणनीति टिकाई गई है। 25 लाख से अधिक किसानों से रिकॉर्ड धान खरीदी, कृषक उन्नति योजना के तहत अतिरिक्त सहायता, सिंचाई क्षमता में विस्तार और फसल विविधीकरण की पहल यह संकेत देती है कि कृषि को केवल उत्पादन नहीं बल्कि आय आधारित मॉडल में बदलने की कोशिश जारी है। मिलेट्स, जैविक खेती और बीज आत्मनिर्भरता जैसे कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती देने की दिशा में देखे जा सकते हैं।
महिला सशक्तिकरण इस विकास मॉडल का सामाजिक आधार बनकर सामने आया है। ‘महतारी वंदन’ जैसी योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाओं को नियमित आय सहायता देने, महतारी सदनों के निर्माण और पोषण कार्यक्रमों के विस्तार से सामाजिक सुरक्षा का ढांचा मजबूत करने का प्रयास दिखता है। यदि यह मॉडल कौशल, स्वरोजगार और स्थानीय उद्यम से जुड़ता है तो यह राज्य की अर्थव्यवस्था में मांग और भागीदारी दोनों बढ़ा सकता है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को साथ लेकर चलने की नीति भी बजट चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सडक़, पुल, मोबाइल कनेक्टिविटी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार यह संकेत देता है कि सरकार इन क्षेत्रों को केवल सुरक्षा चुनौती नहीं बल्कि विकास अवसर के रूप में देख रही है। जनजातीय योजनाओं, वनाधिकार पत्र वितरण और सांस्कृतिक पहल के माध्यम से सामाजिक विश्वास निर्माण की कोशिश निवेश और आर्थिक गतिविधियों के लिए आधार तैयार कर सकती है।
आर्थिक सर्वेक्षण ने इस नीति ढांचे को आंकड़ों के साथ समर्थन दिया है। सकल राज्य घरेलू उत्पाद का लगभग 6.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना और 11.57 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान राज्य की तेज आर्थिक गति को दर्शाता है। कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र तीनों में वृद्धि के अनुमान यह संकेत देते हैं कि अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे संतुलित संरचना की ओर बढ़ रही है। प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि और सेवा क्षेत्र का विस्तार यह भी बताता है कि विकास अब केवल संसाधन आधारित नहीं बल्कि उपभोग और सेवाओं पर आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।

औद्योगिक नीति और निवेश प्रस्ताव इस बदलाव की केंद्रीय कहानी बनते दिखाई देते हैं। आईटी, एआई, फार्मा और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में निवेश रुचि, नवा रायपुर को शिक्षा और तकनीकी हब के रूप में विकसित करने की योजना, स्टार्टअप नीति और कौशल विकास पर जोर ये संकेत देते हैं कि राज्य भविष्य की अर्थव्यवस्था में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। यदि निवेश प्रस्ताव वास्तविक परियोजनाओं में बदलते हैं और रोजगार सृजन से जुड़ते हैं, तो यह परिवर्तन निर्णायक हो सकता है।
इसके साथ ही पिछले बजट और वर्तमान अभिभाषण के बीच निरंतरता स्पष्ट दिखाई देती है। कृषि समर्थन, महिला योजनाएं, सिंचाई विस्तार, अधोसंरचना और निवेश प्रोत्साहन ये प्राथमिकताएं पहले भी थीं और अब भी हैं। कुछ क्षेत्रों में प्रगति दिखती है, जैसे धान खरीदी, प्रत्यक्ष लाभ योजनाएं, सडक़-कनेक्टिविटी और निवेश प्रस्ताव, लेकिन वित्तीय क्रियान्वयन की चुनौती बनी हुई है। पिछले वित्तीय वर्ष में कई विभागों द्वारा आवंटित बजट का पूरा उपयोग नहीं हो पाया, विशेषकर पूंजीगत व्यय और अधोसंरचना परियोजनाओं में खर्च की गति अपेक्षा से धीमी रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि नीति दिशा स्थिर है, पर खर्च क्षमता और परियोजना प्रबंधन में सुधार की जरूरत अभी भी बनी हुई है।

यही कारण है कि आगामी बजट की असली परीक्षा आवंटन से अधिक क्रियान्वयन पर होगी। यदि अप्रयुक्त राशि की समस्या कम होती है, परियोजनाओं की गति तेज होती है और पूंजीगत व्यय बढ़ता है, तो आर्थिक सर्वेक्षण के सकारात्मक संकेत वास्तविक विकास में बदल सकते हैं। अन्यथा घोषणाओं और परिणामों के बीच अंतर बना रह सकता है।
छत्तीसगढ़ की ताकत उसके प्राकृतिक संसाधन, युवा आबादी और रणनीतिक स्थिति में है। निवेश, कौशल, मानव पूंजी और क्षेत्रीय संतुलन पर निरंतर ध्यान राज्य को अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में ला सकता है। विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में विकास और औद्योगिक विस्तार के बीच संतुलन बनाना भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण कसौटी होगा।
यह बजट सत्र एक संक्रमण बिंदु की तरह दिखाई देता है जहां संकेत सकारात्मक हैं, संकल्प स्पष्ट है और संभावनाएं व्यापक हैं। अब बजट यदि इन प्राथमिकताओं को मजबूत वित्तीय समर्थन, बेहतर खर्च क्षमता और समयबद्ध क्रियान्वयन से जोड़ता है, तो विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा ठोस रूप ले सकती है। आने वाले वर्षों में राज्य अग्रणी राज्यों की सूची में स्थान बना पाएगा या नहीं, इसका उत्तर घोषणाओं से नहीं बल्कि बजट के बाद जमीन पर दिखने वाले बदलाव तय है।

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