जनपद में स्कूली वाहनों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष प्रवर्तन अभियान के दौरान परिवहन विभाग ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की। टीम ने एक ऐसे वाहन को पकड़ा, जो पहले एंबुलेंस के रूप में पंजीकृत था, लेकिन उसका इस्तेमाल स्कूल वाहन के तौर पर किया जा रहा था। हैरानी की बात यह रही कि वाहन को स्कूल बस की तरह रंगकर बच्चों को ढोया जा रहा था।

जानकारी के मुताबिक प्रवर्तन टीम स्कूली वाहनों की सघन जांच कर रही थी। इसी दौरान थाना छपार क्षेत्र में एक संदिग्ध वाहन दिखाई दिया। वाहन में स्कूली बच्चे मौजूद थे और उन्हें स्कूल छोड़ा जा रहा था। जांच में पता चला कि वाहन का रजिस्ट्रेशन एंबुलेंस के रूप में है, जबकि उसका उपयोग नियमों के खिलाफ स्कूल वाहन के रूप में किया जा रहा था।
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने जब दस्तावेजों की जांच की तो कई गंभीर खामियां सामने आईं। वाहन बिना फिटनेस सर्टिफिकेट, बिना परमिट और बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के सड़क पर दौड़ रहा था। इसके अलावा वाहन एनसीआर क्षेत्र में लागू एनजीटी के मानकों का भी उल्लंघन करता पाया गया।
नियमों का खुला उल्लंघन मिलने पर परिवहन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वाहन को सीज कर दिया। मोटर वाहन अधिनियम के तहत वाहन पर 40 हजार 250 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं वाहन कर की अलग से गणना परिवहन कार्यालय स्तर पर की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग ने जिले के सभी स्कूल संचालकों और वाहन मालिकों को सख्त चेतावनी दी है। विभाग ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियम विरुद्ध वाहनों का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
विभाग ने यह भी साफ किया कि भविष्य में इस तरह का मामला सामने आने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय की जाएगी और स्कूल की मान्यता रद्द करने की संस्तुति जिला विद्यालय निरीक्षक को भेजी जाएगी।