पटना। 7 मई को प्रस्तावित सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल विस्तार से पहले बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजधानी पटना के गांधी मैदान में होने वाले इस विस्तार को लेकर सत्ता और संगठन दोनों स्तर पर मंथन जारी है।
सबसे ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर है। सूत्रों के अनुसार, जदयू नेताओं के समझाने के बाद निशांत ने मंत्री पद स्वीकार करने पर सहमति दे दी है। शुरुआत में वे सरकार का हिस्सा बनने को तैयार नहीं थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व के दबाव और भूमिका समझाए जाने के बाद वे मान गए।
निशांत कुमार की संभावित एंट्री को जदयू में नई पीढ़ी के आगमन के तौर पर देखा जा रहा है। इसी कारण उनकी प्रस्तावित सद्भाव यात्रा को भी टाल दिया गया है, जो अब 9 मई से शुरू हो सकती है। उन्हें समाज कल्याण विभाग मिलने की चर्चा है।
सूत्रों के मुताबिक, नए मंत्रिमंडल में कुल 36 सदस्य हो सकते हैं। भाजपा कोटे से विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल, राम कृपाल यादव और संजय सिंह के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं। वहीं कुछ पुराने चेहरों की वापसी और नए चेहरों को मौका देने की तैयारी भी है।
जदयू कोटे से श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेशी सिंह, मदन सहनी और अन्य नेताओं के नाम प्रमुख दावेदारों में हैं। महिला प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए शीला कुमारी को भी जगह मिल सकती है। यह कैबिनेट विस्तार बिहार की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है और आगामी चुनावों के लिए रणनीतिक कदम माना जा रहा है।